देशभर में 15 जनवरी को 78वां भारतीय सेना दिवस पूरे सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। यह दिन भारतीय सेना के शौर्य, त्याग, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा को समर्पित है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ से भारतीय सेना की कमान संभाली थी, जिसके बाद भारतीय सेना का नेतृत्व पूरी तरह भारतीय हाथों में आया। तब से हर साल यह दिन सेना के गौरवशाली इतिहास और वीर जवानों के बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है।
सेना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना के जवानों को नमन करते हुए कहा कि वे निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र रक्षा के सच्चे प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय सेना के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि जवानों का समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रधानमंत्री ने उन वीर सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हमेशा अपने शहीदों का ऋणी रहेगा और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। देश का हर नागरिक भारतीय सेना के जवानों की सेवा भावना और देशभक्ति पर गर्व करता है।
सेना दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री, अन्य केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और देशभर के लोग भी जवानों और पूर्व सैनिकों को सम्मान और श्रद्धा के साथ नमन कर रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर परेड, सम्मान समारोह और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें सेना के अनुशासन, शक्ति और पराक्रम का प्रदर्शन किया जा रहा है।
भारतीय सेना केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती है। शांति स्थापना अभियानों से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक, सेना हर मोर्चे पर देश की सुरक्षा की मजबूत ढाल बनी हुई है। सेना दिवस पर पूरा देश उन वीर जवानों को सलाम कर रहा है, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा और सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया।




