अमेरिका-पाक सैन्य अभ्यास पर कांग्रेस ने घेरा केंद्र, जयराम रमेश ने बताया कूटनीतिक विफलता

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कांग्रेस ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह अभ्यास भारत की कूटनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है और इससे सरकार की तथाकथित “विश्वगुरु” छवि को गहरा झटका लगा है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर, पब्बी में 8 जनवरी से 16 जनवरी 2026 तक अमेरिका और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंस्पायर्ड गैम्बिट-2026’ आयोजित किया गया, जिसमें आतंकवाद-रोधी अभियानों, पैदल सेना प्रशिक्षण और रणनीतिक समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने इस अभ्यास को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटनाक्रम “स्वघोषित विश्वगुरु की आत्मप्रशंसक कूटनीति को एक और बड़ा झटका” है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा इस अभ्यास की सफलता की पुष्टि यह दिखाती है कि अमेरिका और पाकिस्तान के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, जबकि भारत की विदेश नीति की दिशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जयराम रमेश ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले जून 2025 में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान को आतंकवाद-रोधी अभियानों में एक “उत्कृष्ट साझेदार” बताया था। इसके अलावा अमेरिकी नेतृत्व द्वारा पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की सार्वजनिक प्रशंसा को भी उन्होंने भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिहाज से संवेदनशील बताया। कांग्रेस का कहना है कि इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामरिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत की कूटनीति को अधिक ठोस और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है।

कांग्रेस का मानना है कि अमेरिका-पाकिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है और इसका असर भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर देश को स्थिति स्पष्ट करे और यह बताए कि पाकिस्तान जैसे देश के साथ अमेरिका के बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा कैसे करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत-अमेरिका-पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है। कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार की विदेश नीति और “विश्वगुरु” की छवि पर एक बड़ा सवाल बताते हुए कहा है कि केवल कूटनीतिक दावों से नहीं, बल्कि ठोस रणनीति और वैश्विक संतुलन के साथ ही भारत अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

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