भ्रामक औषधि विज्ञापनों पर कार्रवाई के लिए 5 यूटी को मिली कानूनी शक्ति

SHARE:

गृह मंत्रालय ने भ्रामक औषधि और तथाकथित जादुई उपचारों से जुड़े विज्ञापनों पर सख्ती करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव और पुडुचेरी — इन पांच केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत कार्रवाई करने के अधिकार दे दिए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ये प्रशासक राष्ट्रपति के नियंत्रण में रहते हुए राज्य सरकारों को मिलने वाली शक्तियों और दायित्वों का प्रयोग अपने-अपने केंद्र शासित प्रदेशों में कर सकेंगे। यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत जारी किया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ अधिनियम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़े भ्रामक और झूठे विज्ञापनों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत उन दवाओं, औषधियों और उपचारों के प्रचार पर प्रतिबंध लगाया जाता है, जो कैंसर, मधुमेह, मोटापा समेत कई गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर झूठे दावे करते हैं। अधिनियम में ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ तलाशी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। अब यह अधिकार सीधे तौर पर केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के पास होगा, जिससे वहां इन मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

गृह मंत्रालय के इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र शासित प्रदेशों में यह कानून पूरी सख्ती से लागू हो और जनता को झूठे स्वास्थ्य दावों से बचाया जा सके। सरकार का मानना है कि इस कदम से लोगों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर लगाम लगेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। अब इन केंद्र शासित प्रदेशों में औषधि और जादुई उपचार के नाम पर किए जाने वाले भ्रामक प्रचार के खिलाफ सीधे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Comment