छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की कमर टूटी, बीजापुर में एक साथ 12 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर जिले में सक्रिय 12 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन माओवादियों पर विभिन्न आपराधिक मामलों में कई लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान सभी ने अपने हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंप दिए। यह कार्रवाई जिला पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य अर्धसैनिक बलों के संयुक्त प्रयास का नतीजा मानी जा रही है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे सघन सर्च ऑपरेशन, लगातार दबाव और विकास योजनाओं के असर के चलते नक्सलियों का संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ा है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बीजापुर और आसपास के इलाकों में नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं और कई गंभीर घटनाओं में उनकी भूमिका सामने आई थी। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ने से नक्सलियों की आवाजाही और रसद आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ा है।

प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। इस नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को सुरक्षा, आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जाता है। इसी कारण कई नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

बीजापुर सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में बीते कुछ समय से नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है। सुरक्षा बलों ने न सिर्फ कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया है, बल्कि नक्सलियों से संवाद और आत्मसमर्पण को भी प्राथमिकता दी है। अधिकारियों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण नक्सल संगठनों के मनोबल को कमजोर कर रहे हैं और क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में यह एक सकारात्मक संकेत है।

प्रशासन ने अभी भी सक्रिय नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर कानून के दायरे में लौटें और सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाएं। अधिकारियों के अनुसार, बीजापुर में 12 माओवादियों का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही रणनीति अब ठोस परिणाम देने लगी है।

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