स्टार्टअप और डेटा इकोनॉमी ने बदली तस्वीर, निवेश में ऐतिहासिक उछाल

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पिछले पांच वर्षों में वैश्विक निवेश परिदृश्य में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है, जिसमें खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और बाजार विश्लेषण रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्तर पर एआई और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश करीब 480 प्रतिशत बढ़कर लगभग 335 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस तेजी के पीछे जनरेटिव एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और मशीन लर्निंग आधारित समाधानों की बढ़ती मांग प्रमुख कारण मानी जा रही है। वेंचर कैपिटल फंडिंग, कॉर्पोरेट निवेश और सरकारी अनुसंधान व्यय—सभी में समान रूप से वृद्धि दर्ज की गई है।

वैश्विक निवेश प्रवाह में अमेरिका और चीन की भूमिका निर्णायक रही है। कुल निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका को मिला, जहां प्रमुख टेक कंपनियों ने अनुसंधान, चिप निर्माण, क्लाउड सेवाओं और एआई मॉडल विकास में भारी पूंजी लगाई। चीन भी इस दौड़ में मजबूती से बना रहा और घरेलू तकनीकी नवाचार, सेमीकंडक्टर विकास तथा सरकारी समर्थन के बल पर दूसरे स्थान पर रहा। इन दोनों देशों की आक्रामक निवेश रणनीतियों ने वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।

इस बीच भारत तेजी से उभरते निवेश गंतव्य के रूप में सामने आया है। 2020 से 2024 के दौरान भारत में एआई और संबंधित प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। डिजिटल इंडिया अभियान, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, युवा तकनीकी प्रतिभा और तेजी से बढ़ती इंटरनेट पहुंच ने देश को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है। डेटा सेंटर, फिनटेक, हेल्थटेक और एडटेक जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय पूंजी प्रवाह हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि 2030 तक एआई आधारित वैश्विक बाजार का आकार एक ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच सकता है। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को गति मिलेगी बल्कि रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, पिछले पांच वर्षों में दर्ज 480 प्रतिशत की वृद्धि वैश्विक निवेश प्रवृत्तियों में बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहां तकनीक भविष्य की अर्थव्यवस्था की धुरी बनती जा रही है।

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