ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद भारत के कई हिस्सों में विरोध और शोक सभाओं का दौर शुरू हो गया। खासतौर पर जम्मू और कश्मीर और उत्तर प्रदेश के शिया बहुल इलाकों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। प्रशासन ने हालात को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
श्रीनगर सहित घाटी के बडगाम, पुलवामा और बारामूला जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लहराए, खामेनेई की तस्वीरें हाथ में लेकर मार्च निकाला और अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर मस्जिदों और इमामबाड़ों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। स्थानीय समुदाय के नेताओं ने इसे मुस्लिम दुनिया के लिए बड़ी क्षति बताया और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, फिर भी प्रशासन ने एहतियातन ड्रोन निगरानी और गश्त बढ़ा दी है।
उधर लखनऊ और संभल समेत उत्तर प्रदेश के कुछ अन्य शहरों में भी शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाले। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर विरोध जताया। कई स्थानों पर मौन मार्च भी निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रदेशभर में हाई अलर्ट जारी करते हुए धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की भड़काऊ सामग्री से कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
इस बीच जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक नेता ओमर अब्दुल्ला समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भावनाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था से बचना जरूरी है। कुल मिलाकर, खामेनेई की मौत की खबर ने भारत के कुछ हिस्सों में भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की है, लेकिन प्रशासनिक सतर्कता के चलते स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।




