संयुक्त राष्ट्र में “इस्लामोफोबिया से मुकाबला करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस” के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए उस पर इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने का आरोप लगाया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल धार्मिक भावनाओं को भड़काने और राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक धर्म के आधार पर वैश्विक विमर्श को सीमित करना उचित नहीं है और सभी धर्मों के खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव की समान रूप से निंदा होनी चाहिए।
भारत ने अपने बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक समाज का उल्लेख करते हुए कहा कि देश सदियों से विभिन्न धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का उदाहरण रहा है। साथ ही, भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और वहां अहमदिया समुदाय के उत्पीड़न तथा अफगानिस्तान पर रमज़ान के दौरान किए गए हवाई हमलों जैसे मुद्दे उठाए। भारत ने सवाल किया कि जो देश खुद धार्मिक असहिष्णुता के आरोपों से घिरा है, वह दूसरों पर इस्लामोफोबिया का आरोप कैसे लगा सकता है।
अपने बयान में भारत ने यह भी कहा कि धर्म को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धार्मिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई को व्यापक, निष्पक्ष और संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही जारी है, और दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहे हैं।




