पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है और अब यह एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने घोषणा की है कि उसने अपने सैन्य अभियान “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” के 78वें चरण की शुरुआत कर दी है। ईरान की इस प्रमुख सैन्य इकाई के अनुसार, इस चरण में इज़राइल के कई महत्वपूर्ण ठिकानों के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। IRGC ने यह भी संकेत दिया है कि अब वह अपने विरोधियों के साथ “दबाव आधारित रणनीति” के तहत कार्रवाई जारी रखेगा।
इस बीच, हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि खाड़ी के प्रमुख देश Saudi Arabia और United Arab Emirates भी इस संघर्ष में शामिल होने की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान द्वारा लगातार हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरे के चलते इन देशों पर जवाबी कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी है, जबकि यूएई ने भी ईरान से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है।
ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और यूएई सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल होते हैं, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
इसी बीच, United States भी इस संकट में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और उसने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को अस्थायी रूप से रोका गया है, लेकिन तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ कार्रवाई तेज होती है, तो वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा।
इस बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव हो रहा है, जबकि समुद्री व्यापार और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। कुल मिलाकर, “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” के 78वें चरण की शुरुआत और खाड़ी देशों की संभावित भागीदारी ने पश्चिम एशिया के हालात को और अधिक विस्फोटक बना दिया है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।




