उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसी दिशा में सरकार ने 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले 14 नए फूड प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित किया जाएगा। इन परियोजनाओं के जरिए कृषि उत्पादन को सीधे बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।
इन फूड प्रोसेसिंग इकाइयों में फल, सब्जियां, डेयरी, पोल्ट्री और रेडी-टू-कुक उत्पादों जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिससे कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस सेक्टर के विस्तार से न केवल कृषि आधारित उद्योगों को गति मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं को काम मिलेगा और पलायन में भी कमी आने की संभावना है।
राज्य सरकार अपनी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पॉलिसी के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और अन्य प्रोत्साहन भी दे रही है। इसके साथ ही राज्य में बड़ी संख्या में फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है, ताकि कृषि क्षेत्र को औद्योगिक आधार मिल सके। बजट 2026-27 में भी इस क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें कोल्ड चेन, एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर और माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के विकास के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।
केंद्र सरकार की PMFME जैसी योजनाएं भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं, जिनके तहत सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और ब्रांडिंग सपोर्ट दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने की यह पहल उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने, फसल नुकसान कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।




