हाइड्रो पावर में भारत-भूटान की साझेदारी को नई उड़ान, परियोजना कार्य फिर चालू

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भारत और Bhutan के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हुए पुनात्सांगछू-1 जलविद्युत परियोजना का काम करीब सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar ने भूटान का दौरा किया और परियोजना स्थल पर बांध में कंक्रीट डालने की प्रक्रिया की शुरुआत कर इसे एक अहम उपलब्धि बताया। लगभग 1200 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग की सबसे बड़ी पहलों में से एक है, जो दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

दरअसल, यह परियोजना 2019 के आसपास भू-गर्भीय चुनौतियों और तकनीकी समस्याओं के कारण ठप हो गई थी, लेकिन अब आवश्यक सुधारों और सुरक्षा उपायों के बाद इसे दोबारा शुरू किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है और इसके पूर्ण होने के बाद भूटान की जलविद्युत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे न केवल भूटान की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि भारत को भी स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

दौरे के दौरान मंत्री ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के इंजीनियरों और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत और भूटान के गहरे विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने पुनात्सांगछू-2 परियोजना का भी निरीक्षण किया, जिसका उद्घाटन पहले Narendra Modi और भूटान के राजा Jigme Khesar Namgyel Wangchuck द्वारा किया जा चुका है और जो वर्तमान में बिजली उत्पादन कर रही है।

कुल मिलाकर, पुनात्सांगछू-1 परियोजना का दोबारा शुरू होना भारत-भूटान संबंधों में नई गति और विश्वास का संकेत है। यह परियोजना न केवल ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी और गहराई प्रदान करेगी।

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