उत्तराखंड में मदरसों को लेकर सख्ती के बीच राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए Dehradun समेत चार जिलों के सभी मदरसों की जांच के आदेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देश पर जिला प्रशासन की निगरानी में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मदरसों के पंजीकरण, फंडिंग स्रोत, जमीन से जुड़े दस्तावेज और वहां पढ़ने वाले छात्रों की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। सरकार को मिली शिकायतों के अनुसार कई मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं और उनमें बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाया जा रहा है, जिसके चलते इस पहलू की विशेष रूप से जांच के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की पहचान, उनकी पृष्ठभूमि और वे किन राज्यों से आए हैं, इसकी पूरी जानकारी एकत्र की जाए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। इस अभियान के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं, जो तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेंगी। इन समितियों को मदरसों की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रों की संख्या और संस्थानों के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार पहले भी अवैध या नियमों का पालन न करने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है, जिसमें कई स्थानों पर मदरसों को सील किया गया और उनके वित्तीय स्रोतों की जांच शुरू की गई। वर्तमान कार्रवाई को उसी क्रम का विस्तार माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और उन्हें निर्धारित नियमों के दायरे में लाना है। साथ ही प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि जांच के दौरान बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और आवश्यकता पड़ने पर उनके लिए वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस पूरे मामले को राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे व्यापक बदलावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार पहले ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर एक नई नियामक व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है, जिसके तहत सभी शिक्षण संस्थानों को एक समान नियमों के तहत लाने की योजना है। कुल मिलाकर, देहरादून समेत चार जिलों में मदरसों की जांच के आदेश राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य अवैध संस्थानों पर नियंत्रण, शिक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है, हालांकि इस कदम को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।




