खाड़ी में फिर गरमाया माहौल, अमेरिका-ईरान संघर्ष से दुनिया चिंतित

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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहे अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों को निशाना बनाते हुए मिसाइल, ड्रोन और तेज रफ्तार सैन्य नौकाओं के जरिए हमला करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसकी एडवांस एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी हमलों को बीच रास्ते में ही नाकाम कर दिया और किसी भी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार हमला देर रात उस समय हुआ जब अमेरिकी युद्धपोत नियमित गश्त पर थे। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को समय रहते मार गिराया गया, जबकि संदिग्ध तेज रफ्तार नौकाओं को भी रोक दिया गया। जिन युद्धपोतों को निशाना बनाया गया उनमें USS Truxton, USS Rafael Peralta और USS Mason शामिल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और ड्रोन कंट्रोल सेंटर पर हवाई हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं।

दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई। ईरान का कहना है कि अमेरिका लगातार खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। ईरानी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी जहाजों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा, हालांकि अमेरिका ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी जहाजों या सैनिकों को निशाना बनाया गया तो अमेरिका “और अधिक सख्त और निर्णायक जवाब” देगा। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और समुद्री व्यापार भी प्रभावित हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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