ईरान-इस्राइल संघर्ष का असर दुनिया पर, सप्लाई चेन और तेल कारोबार प्रभावित

SHARE:

Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और जरूरी सामानों की आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होने के बीच ईरान ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर United States और इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी प्रतिबंधों, समुद्री दबाव और इस्राइली सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पर ईरान के खिलाफ “आर्थिक चक्रव्यूह” रचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना है।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर देखने को मिल रहा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी और नियंत्रण सख्त कर दिया है, जबकि अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात और बंदरगाह गतिविधियों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके चलते कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकती है।

ईरान का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का असर केवल तेल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है। देश के भीतर महंगाई बढ़ने लगी है और कई इलाकों में बिजली तथा ईंधन की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं ट्रंप प्रशासन लगातार ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिका ने कई देशों को चेतावनी दी है कि वे ईरानी तेल खरीदने से बचें, अन्यथा उन्हें भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि वाशिंगटन की यह रणनीति ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करने और उसे बातचीत की मेज पर लाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

इस संकट का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन, खाद्य वस्तुओं और उर्वरकों की लागत बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

Leave a Comment