Lucknow Development Authority ने राजधानी में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। लखनऊ के सीतापुर रोड क्षेत्र में शिया पीजी कॉलेज के पास खाली कराई गई जमीन पर एलडीए करीब 900 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) और ईडब्ल्यूएस (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) श्रेणी के फ्लैटों का निर्माण करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य उन परिवारों को आधुनिक सुविधाओं के साथ सस्ते घर उपलब्ध कराना है, जो लंबे समय से राजधानी में अपना आशियाना खरीदने का सपना देख रहे हैं। एलडीए अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत बनने वाले फ्लैटों की कीमत 15 लाख रुपये से 35 लाख रुपये के बीच रखी जाएगी, ताकि मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोग आसानी से घर खरीद सकें।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि परियोजना के लिए लगभग 16 हजार वर्गमीटर जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है। इस जमीन पर ग्रुप हाउसिंग योजना विकसित की जाएगी, जिसके लिए विस्तृत ले-आउट और कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। योजना के तहत 582 एलआईजी और 336 ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट बनाए जाएंगे। एलआईजी श्रेणी के फ्लैट 2 बीएचके होंगे, जिनका क्षेत्रफल करीब 50 वर्गमीटर होगा और इनकी संभावित कीमत लगभग 35 लाख रुपये तय की गई है। वहीं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट 1 बीएचके होंगे, जिनका क्षेत्रफल लगभग 38 वर्गमीटर होगा और इनकी कीमत करीब 15 लाख रुपये रखी जाएगी।
परियोजना की खास बात इसकी लोकेशन और आधुनिक सुविधाएं हैं। सीतापुर रोड से राष्ट्रीय राजमार्ग की सीधी कनेक्टिविटी होने के कारण यहां रहने वाले लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। आसपास पहले से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बाजार, मॉल और रेलवे स्टेशन जैसी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे यह आवासीय योजना और अधिक आकर्षक बन गई है। एलडीए का मानना है कि कम कीमत और प्राइम लोकेशन के कारण इस योजना में बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना है।
अपार्टमेंट परिसर में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सभी टावर आपस में जुड़े होंगे ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके। परिसर में आठ पैसेंजर लिफ्ट और तीन सर्विस लिफ्ट लगाई जाएंगी। इसके अलावा 600 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। करीब तीन हजार वर्गमीटर क्षेत्र में पार्क और ग्रीन एरिया विकसित किए जाएंगे, जिससे लोगों को बेहतर और हरित वातावरण मिल सके।
एलडीए के अनुसार, अगले छह महीनों में योजना के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जा सकती है और फ्लैटों का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना राजधानी में किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




