नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया संकट को लेकर बड़ा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला। बैठक में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने BRICS संगठन की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में युद्ध, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बैठक में आरोप लगाया कि UAE ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरान विरोधी ताकतों का अप्रत्यक्ष समर्थन किया और इस्राइल के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने से बचता रहा। उन्होंने BRICS सदस्य देशों से अमेरिका और इस्राइल की नीतियों की खुलकर आलोचना करने की मांग की। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप जिम्मेदार है और BRICS को इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
वहीं UAE की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया। UAE प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी देश को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़े। UAE ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कूटनीतिक समाधान और शांति वार्ता का समर्थक है।
बैठक के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को बीच में हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि BRICS के विस्तारित स्वरूप में शामिल नए सदस्य देशों के बीच विदेश नीति को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।
भारत ने इस पूरे विवाद के बीच संतुलित और संयमित रुख अपनाया। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई और सभी पक्षों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS अब केवल आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक राजनीतिक मुद्दों पर भी प्रभाव डालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि ईरान और UAE के बीच खुलकर सामने आया यह विवाद संगठन की सामूहिक रणनीति के लिए चुनौती बन सकता है। माना जा रहा है कि भारत आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश करेगा ताकि संगठन की एकजुटता बनी रहे।




