मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Israel और Lebanon के बीच लागू युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह फैसला अमेरिका की मध्यस्थता में वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद लिया गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच दो दिनों तक चली बातचीत में सीमा सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि युद्धविराम बढ़ाने का उद्देश्य मौजूदा संघर्ष को और फैलने से रोकना तथा स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना है।
वार्ता के दौरान लेबनान की ओर से दक्षिणी क्षेत्रों में इस्राइली सैन्य कार्रवाई रोकने और सीमा क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी की मांग उठाई गई, जबकि इस्राइल ने हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नियंत्रण और सीमा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया। अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है तथा कहा कि दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय बाद दोनों देशों के बीच इस स्तर की बातचीत क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
हालांकि युद्धविराम की अवधि बढ़ने के बावजूद सीमा क्षेत्रों में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इस्राइल के कुछ इलाकों में छिटपुट हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। संघर्ष के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने और युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील की है।
अमेरिका की पहल पर अब आगे की वार्ताओं का कार्यक्रम भी तय किया गया है। जानकारी के अनुसार अगली सैन्य स्तर की बैठक 29 मई को आयोजित की जाएगी, जबकि जून के पहले सप्ताह में राजनीतिक स्तर की अहम बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में सीमा विवाद, स्थायी युद्धविराम और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बातचीत सफल रहती है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।




