फर्जी कंपनियों के सहारे करोड़ों की टैक्स चोरी, दिल्ली पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने राजधानी में चल रहे एक बड़े जीएसटी घोटाले का खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क फर्जी कंपनियों, नकली बिलों और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल करने के जरिए करीब 128 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन में शामिल था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 51 लाख रुपये से अधिक की नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज, मुहरें और अन्य डिजिटल सबूत भी जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से जीएसटी धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।

जांच में सामने आया कि इस सिंडिकेट ने करीब 50 फर्जी या शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनका इस्तेमाल नकली जीएसटी बिल तैयार करने, फर्जी रिटर्न दाखिल करने और बैंक खातों के जरिए अवैध धन के लेनदेन के लिए किया जाता था। इन कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। पुलिस के अनुसार कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और उनके नाम पर कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं हो रही थी।

यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर उसके नाम पर फर्जी कंपनी बनाई गई है। जांच के दौरान पता चला कि सितंबर 2025 में उसके नाम पर “एम/एस आरके एंटरप्राइजेज” नामक फर्म बनाई गई थी और उसके जरिए 128 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन किया गया। पुलिस का कहना है कि इस फर्जी कंपनी के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया।

तकनीकी निगरानी, बैंक खातों और जीएसटी रिकॉर्ड की जांच के बाद पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों के मुताबिक राज कुमार दीक्षित और दिलीप कुमार इस सिंडिकेट के मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में फर्जी कंपनियां तैयार कीं और उनके जरिए फर्जी बिलिंग का जाल फैलाया। गिरोह में शामिल अन्य सदस्य बैंक खाते उपलब्ध कराने, इंटरनेट बैंकिंग संचालित करने और नकली दस्तावेज तैयार करने का काम करते थे।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 15 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कई सिम कार्ड, फर्जी मुहरें, बड़ी संख्या में नकली बिल और दो कारें भी बरामद कीं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क फर्जी जीएसटी इनवॉइस के जरिए काले धन को वैध दिखाने और बैंकिंग चैनलों से अवैध रकम ट्रांसफर करने का काम कर रहा था। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।

विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में फर्जी जीएसटी बिलिंग और शेल कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल के महीनों में कई राज्यों में करोड़ों रुपये के जीएसटी घोटालों का खुलासा हुआ है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई संगठित आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है।

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