देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक और संसदीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बीच संसद की स्थायी समिति के समक्ष राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के वरिष्ठ अधिकारी पेश हुए और परीक्षा प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था तथा आगामी सुधारों को लेकर विस्तृत जानकारी दी। शिक्षा, महिला, बाल विकास, युवा एवं खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निगरानी तंत्र और छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों से कई सवाल पूछे। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कायम रह सके।
बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह की टिप्पणी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं NEET परीक्षा और उससे जुड़े घटनाक्रमों की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न होगी। दिग्विजय सिंह ने जवाबदेही के शीर्ष स्तर तक तय होने का उल्लेख करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री स्तर पर निगरानी की बात सामने आ रही है, तब परीक्षा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि बाद में कांग्रेस की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस बयान को सरकार को समर्थन देने या ‘क्लीन चिट’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों के हित में निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा की उम्मीद के रूप में समझा जाना चाहिए।
संसदीय समिति ने NTA अधिकारियों से प्रस्तावित पुनर्परीक्षा की तैयारियों, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और गड़बड़ियों को रोकने के उपायों पर विस्तृत जानकारी मांगी। समिति ने यह भी जोर दिया कि परीक्षा विवाद का असर मेडिकल काउंसलिंग, दाखिला प्रक्रिया और छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही गई कि परीक्षा संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या तकनीकी खामी की गुंजाइश न रहे।
NEET विवाद के बीच देशभर में छात्र संगठनों, अभिभावकों और विपक्षी दलों की ओर से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। कई संगठनों ने शिक्षा मंत्रालय और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सख्त सुधारों की आवश्यकता जताई है। दूसरी ओर केंद्र सरकार और NTA का कहना है कि परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए अतिरिक्त निगरानी तंत्र, सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी की संभावना को रोका जा सके। फिलहाल पूरे मामले पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया, संसदीय समिति की सिफारिशें और परीक्षा प्रणाली में संभावित बदलाव इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।




