केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री Annapurna Devi ने कहा है कि पिछले दस वर्षों में भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है और यह दौर वास्तव में “नारी शक्ति का दशक” साबित हुआ है। उनके अनुसार विकसित भारत के निर्माण का सपना तभी साकार हो सकता है जब महिलाएं समाज और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि देश अब केवल महिला विकास की अवधारणा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास के मॉडल को अपनाते हुए आगे बढ़ रहा है, जहां महिलाएं परिवर्तन की भागीदार ही नहीं बल्कि उसकी प्रमुख संचालक भी बन रही हैं।
अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि करोड़ों महिलाएं आज स्वरोजगार, लघु उद्योग, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और लाखों महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में उभरकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है।
मंत्री ने कहा कि महिलाओं के विकास और कल्याण के लिए बजटीय प्रावधानों में भी लगातार वृद्धि की गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि देश के विकास की प्रमुख शक्ति के रूप में देखती है। इसी सोच के तहत महिलाओं को उद्यमिता, डिजिटल सशक्तिकरण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए नई पहलें शुरू की गई हैं, जिससे वे स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक अपनी पहचान बना सकें।
अन्नपूर्णा देवी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में बेटियों की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती है कि सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। सरकार छात्राओं को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि वे विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण अभियान और आंगनवाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे कार्यक्रम महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार बनती है। अन्नपूर्णा देवी के अनुसार, नारी शक्ति का यह दशक भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का दशक है, जिसने महिलाओं को नई पहचान, नए अवसर और नई ऊर्जा प्रदान की है। उनका मानना है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी ताकत साबित होगी।




