रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले इस्राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक, सहयोग बढ़ाने पर जोर

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भारत और इस्राइल के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से इस्राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बाराम ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री Rajnath Singh से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन, सैन्य आधुनिकीकरण, अनुसंधान एवं विकास तथा भविष्य की साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

भारत और इस्राइल के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। इस्राइल भारत को उन्नत रक्षा तकनीक, मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन, निगरानी उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणालियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करता रहा है। दोनों देशों ने कई संयुक्त परियोजनाओं पर भी काम किया है, जिनका उद्देश्य आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी समाधान विकसित करना है।

बैठक के दौरान ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। भारत सरकार रक्षा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है और इस दिशा में इस्राइल को एक महत्वपूर्ण तकनीकी साझेदार के रूप में देखा जाता है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने, नई तकनीकों के विकास और संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। माना जा रहा है कि इससे भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और अत्याधुनिक तकनीकों तक पहुंच आसान होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, नई सुरक्षा चुनौतियां और आधुनिक युद्ध तकनीकों का बढ़ता उपयोग देशों को अपने रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रहा है। ऐसे में भारत और इस्राइल के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के हितों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक में दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक रक्षा सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा और उभरती सैन्य चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संवाद केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण, अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को भी नई दिशा देगा। माना जा रहा है कि इस मुलाकात से भारत-इस्राइल रक्षा संबंधों को और मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में कई नई संयुक्त परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे दोनों देशों की सामरिक साझेदारी और अधिक गहरी हो सकेगी।

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