चंपत राय के इस्तीफे की खबरों पर दोनों नेताओं ने नहीं खोला पत्ता
Reported by: निखिल रस्तोगी
नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा गड़बड़ी में (42 दिनों में 70 बार चोरी) के बाद अब सत्ता के गलियारों और सांगठनिक स्तर पर अब भी कहीं न कहीं कूटनीति का सहारा लिया जा रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के ‘नैतिक इस्तीफे’ की खबर से मचे भूचाल के बीच आज जब केंद्र सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और विश्व हिंदू परिषद VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार मीडिया के सामने आए, तो आज शुरुआती दौर में दोनों ही इस इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि करने से साफ बचते नजर आए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और विहिप का शीर्ष नेतृत्व शुरुआत में इस इस्तीफे पर ‘ऑन-रिकॉर्ड’ मुहर लगाने से कतराता रहा। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है कि यदि वे इस्तीफे की बात स्वीकार कर लेते, तो उनसे यह कड़ा प्रश्न पूछा जाता कि “अगर गड़बड़ी केवल निचले स्तर के 8 कर्मचारियों ने की थी, तो ट्रस्ट के सबसे कद्दावर चेहरों को इस्तीफा क्यों देना पड़ा? क्या इस घोटाले की आंच और ऊपर तक जा रही है?” इसी कड़े सवालों की झड़ी और कानूनी घेरेबंदी से बचने के लिए आज दोनों ही नेताओं ने ‘आधिकारिक जानकारी न होने’ का सुरक्षित बहाना बनाए रखा।
सरकार का ‘डैमेज कंट्रोल’ और विपक्ष पर आक्रामक वार
इस्तीफे के सवाल को कूटनीतिक रूप से टालने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने पूरा मोर्चा संभालते हुए विपक्ष पर तीखे बाण छोड़े, ताकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके:
योगी सरकार की साख का हवाल|
बीएल वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून का राज है। शुरुआती जांच आते ही 24 घंटे के भीतर सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। कानून पूरी तरह निष्पक्ष है और कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा।

सपा-आप को घेरा
विपक्ष पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि यह वही पार्टी है जिसने मंदिर निर्माण का विरोध किया और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के संजय सिंह को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिन पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप हो, उन्हें हर पवित्र काम में घोटाला ही नजर आता है। अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे को उन्होंने आस्था नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक मजबूरी’ करार दिया।
VHP का ‘फास्ट ट्रैक’ दांव
लापरवाही मानी, लेकिन सीबीआई से परहेज कर, यूपी पुलिस पर पूरा भरोसा जताया, इस्तीफे की बात को ‘नॉन-कन्फर्म’ रखते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संगठन की साख बचाने के लिए एक नया दांव खेला है:
फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
वीएचपी ने मांग की है कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो, ताकि 4 से 5 महीने के भीतर जांच और ट्रायल पूरा कर दोषियों को सीधे जेल भेजा जा सके।
ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल
आलोक कुमार ने बेहद नाप-तौल कर बयान देते हुए माना कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) प्रशासनिक स्तर पर घोर लापरवाही की बात सामने आती है। इसकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद होगी, लेकिन यह जांचना जरूरी है कि यह खेल कब से चल रहा था और ट्रस्ट समय रहते इसे रोकने में नाकाम क्यों रहा?
यूपी पुलिस पर भरोसा,चंपत राय का बचाव
वीएचपी ने विपक्ष की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर पूरा भरोसा है। साथ ही चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि वे स्वयं एसआईटी (SIT) के सामने पेश होकर खुद ही जांच की बात कह चुके हैं।
साख बचाने की छटपटाहट
आज बीएल वर्मा और आलोक कुमार के बयानों की टाइमिंग और उनके तेवरों से एक बात बिल्कुल साफ है कि बीजेपी और संघ परिवार इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर में ‘दानचोरी’ का यह जिन्न उनके पूरे नैरेटिव को नुकसान कर सकता है।
यही कारण है कि एक तरफ जहां चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा लेकर अंदरूनी तौर पर सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है, वहीं जनता के सामने आधिकारिक पुष्टि न करके तीखे और असहज करने वाले सवालों से बचने का रास्ता निकाला जा रहा है। अब देखना यह है कि 13 जुलाई को जब एसआईटी और कोर्ट के सामने नए तथ्य आएंगे, तब तक सरकार इस खामोशी के पर्दे को कितनी देर तक खींच पाती है।




