भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) का असर पहले ही दिन देखने को मिला। समझौते के लागू होने के पहले दिन भारत ने ब्रिटेन को करीब 14 करोड़ डॉलर मूल्य का सामान शून्य आयात शुल्क के साथ निर्यात किया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते ने भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के बाजार में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। सरकार का मानना है कि इससे भारत के निर्यात को गति मिलेगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी पहले से अधिक मजबूत होगी।
CETA के तहत ब्रिटेन ने भारतीय उत्पादों की अधिकांश श्रेणियों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। इससे भारतीय सामान ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होगा और निर्यातकों को पहले की तुलना में बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), किसानों, कारीगरों और श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलेगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस व्यापार समझौते से सबसे अधिक फायदा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। इन क्षेत्रों के उत्पाद अब ब्रिटेन में कम शुल्क के कारण अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से रत्न एवं आभूषण उद्योग ने पहले ही दिन लगभग एक करोड़ डॉलर मूल्य के आभूषणों की पहली खेप ब्रिटेन भेजकर इस समझौते का लाभ उठाना शुरू कर दिया।
समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा क्षेत्र के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के बाजार में अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही, कुछ श्रेणियों के भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़ी राहत भी मिलने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच सेवा क्षेत्र का सहयोग और मजबूत होगा।
दूसरी ओर, इस समझौते से ब्रिटेन को भी लाभ मिलेगा। भारत चरणबद्ध तरीके से ब्रिटिश उत्पादों जैसे प्रीमियम कारें, स्कॉच व्हिस्की, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य चुनिंदा वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा। इससे भविष्य में भारतीय उपभोक्ताओं को इन उत्पादों की कीमतों में राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके CETA दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति और मजबूत होगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।




