सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे ने पूरे राज्य को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसा NHPC की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना से जुड़ी निर्माणाधीन सुरंग में हुआ, जहां सुरंग के भीतर अचानक गैस जमा होने के बाद विस्फोट की आशंका जताई गई। इस दुर्घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत की खबर सामने आई है। घटना के बाद कुछ मजदूरों के सुरंग के भीतर फंसे होने की सूचना मिली, जिसके बाद विभिन्न एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया।
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया। NDRF, SDRF, सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, जिला प्रशासन, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के जवानों के साथ मेडिकल टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और स्वयंसेवकों की मदद से भी अभियान चलाया गया। सुरंग के भीतर जहरीली गैसों, कम दृश्यता और अस्थिर परिस्थितियों के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए फंसे मजदूरों तक पहुंचने और मृतकों के शवों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
प्रारंभिक जानकारी में सुरंग के भीतर मीथेन या अन्य गैसों के जमा होने के बाद विस्फोट की आशंका जताई गई है। हालांकि, हादसे का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक जांच का विषय है। सुरंग के भीतर गैसों की मौजूदगी और निर्माण क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों ने राहत एवं बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति का आकलन करने के बाद बचाव दलों को चरणबद्ध तरीके से सुरंग के अंदर भेजा गया, ताकि किसी अन्य दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
इस दर्दनाक हादसे का असर सिक्किम विधानसभा में भी देखने को मिला। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले मजदूरों को श्रद्धांजलि दी और उनके सम्मान में मौन रखा। सदन में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बातचीत कर हादसे की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति दुख व्यक्त किया और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राहत और बचाव अभियान की स्थिति से अवगत कराया तथा केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से बातचीत कर सुरंग हादसे और जारी बचाव अभियान की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी लेते हुए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। गृह मंत्रालय और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों की ओर से राहत एवं बचाव कार्य में लगी टीमों को आवश्यक सहयोग देने की बात कही गई है।
राज्य सरकार ने भी हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री की ओर से मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की जानकारी दी गई। सरकार ने प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने और बचाव अभियान को प्राथमिकता के आधार पर जारी रखने का आश्वासन दिया है।
सिक्किम जैसे पहाड़ी और भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में सुरंग और जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण कई प्राकृतिक जोखिमों के बीच किया जाता है। कमजोर भूगर्भीय संरचना, चट्टानों का खिसकना, भूमिगत गैसों का जमा होना और सीमित वेंटिलेशन जैसी परिस्थितियां निर्माण कार्यों में जोखिम बढ़ा सकती हैं। इस हादसे के बाद सुरंग निर्माण परियोजनाओं में गैस निगरानी प्रणाली, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकासी मार्ग और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस हादसे का अंतिम कारण विस्तृत आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सिक्किम सुरंग हादसा राज्य के लिए एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन गया है। एक ओर विधानसभा ने मृतकों को श्रद्धांजलि देकर शोक व्यक्त किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बचाव अभियान को पूरा करना, सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचना, मृतकों के शवों को बाहर निकालना और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही हादसे की जांच के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरंग निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है।




