देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA में बड़े संस्थागत सुधारों की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। शिक्षा मंत्रालय और NTA की ओर से परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र तैयार करने, तकनीकी व्यवस्था, उम्मीदवारों की पहचान, निगरानी और शिकायत निवारण से जुड़े पूरे तंत्र की समीक्षा की जा रही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी परीक्षा व्यवस्था को तनावमुक्त और लगभग शून्य-त्रुटि वाला बनाने की दिशा में सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
NTA की स्थापना वर्ष 2018 में उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश और फेलोशिप से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित करने के लिए की गई थी। सरकार के अनुसार, एजेंसी अब तक सैकड़ों परीक्षाएं आयोजित कर चुकी है और करोड़ों उम्मीदवारों से जुड़ी परीक्षा प्रक्रियाओं को संभाल चुकी है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर काम करने वाली संस्था की प्रशासनिक क्षमता को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार NTA में स्थायी कर्मचारियों की संख्या सीमित है, जबकि इसके कामकाज में अनुबंध और आउटसोर्स कर्मचारियों की भी भूमिका है। इस स्थिति ने एजेंसी की संस्थागत क्षमता और परीक्षा संचालन के लिए स्थायी विशेषज्ञता की जरूरत पर बहस को तेज किया है।
सरकार ने NTA में सुधारों के लिए पहले ही कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने राष्ट्रीय साझा प्रवेश परीक्षाओं में सुधार से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद सुधारों को लागू करने की निगरानी के लिए पूर्व ISRO अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति बनाई गई। सुधारों में राज्यों के साथ बेहतर संस्थागत समन्वय, परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करना और परीक्षा के अलग-अलग चरणों में उम्मीदवारों की पहचान की पुष्टि जैसे उपाय शामिल हैं।
NTA की ओर से जारी सुधार कार्यक्रम में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके अनुवाद, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स तक पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। एजेंसी ने कहा है कि तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को परीक्षा प्रक्रिया के हर महत्वपूर्ण चरण में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स आधारित निगरानी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार मॉनिटरिंग जैसे उपायों पर भी काम किया जा रहा है। परीक्षा संचालन में आंतरिक नियंत्रण, ऑडिट व्यवस्था और केंद्र व राज्य सरकारों के साथ समन्वय को भी मजबूत करने की योजना है।
नई व्यवस्था में अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। परीक्षा में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी, गलत प्रश्न, परिणाम में देरी या किसी अन्य गंभीर लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। सरकार की मौजूदा सुधार दिशा से संकेत मिलता है कि परीक्षा प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका को अधिक स्पष्ट किया जाएगा। निगरानी और ऑडिट सिस्टम मजबूत होने से किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही का पता लगाना और जवाबदेही तय करना आसान हो सकता है।
NTA की परीक्षा प्रणाली को लेकर पिछले वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा स्थगित होने, प्रश्नों में त्रुटियों, परिणामों में देरी और परीक्षा केंद्रों से जुड़ी समस्याओं जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर चिंता पैदा की। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने परीक्षा संचालन को अधिक पेशेवर बनाने और एक समान मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उद्देश्य यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय परीक्षाओं में सुरक्षा और संचालन के मानक एक जैसे हों।
इसी बीच CBSE की On-Screen Marking यानी OSM प्रणाली भी समीक्षा के केंद्र में है। OSM व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रणाली को पारदर्शिता और तेज मूल्यांकन के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन इसके संचालन को लेकर छात्रों और विशेषज्ञों की ओर से कई सवाल उठे। एक आंतरिक ड्राई रन रिपोर्ट में तकनीकी और संचालन से जुड़ी कई चिंताओं का उल्लेख किया गया था। इनमें स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था, डेटा सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े संभावित जोखिम शामिल थे।
OSM को लेकर उठे विवाद के बाद संसदीय समिति ने भी NEET, NTA और CBSE की परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की। इस समीक्षा का उद्देश्य परीक्षा संचालन में मौजूद कमियों, तकनीकी प्रक्रियाओं और उम्मीदवारों की शिकायतों का आकलन करना था। शिक्षा मंत्री ने भी CBSE की OSM व्यवस्था में सामने आई कुछ विसंगतियों को स्वीकार करते हुए छात्रों की चिंताओं के समाधान और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। हालांकि, OSM प्रणाली संचालित करने वाली कंपनी ने व्यापक तकनीकी विफलता के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि कई शिकायतें अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी थीं, न कि किसी व्यापक तकनीकी खराबी से।
NTA में प्रस्तावित सुधारों का एक बड़ा हिस्सा मानव संसाधन और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने से भी जुड़ा है। एजेंसी में वरिष्ठ स्तर पर विशेषज्ञता और अनुभव वाले अधिकारियों को शामिल करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर होने वाली राष्ट्रीय परीक्षाओं को अधिक पेशेवर ढंग से संचालित करना है। परीक्षा प्रबंधन में विशेषज्ञ अधिकारियों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और स्पष्ट जिम्मेदारी व्यवस्था को शामिल करना भविष्य की परीक्षा प्रणाली के लिए अहम माना जा रहा है।
सरकार का व्यापक लक्ष्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परिणाम जारी होने तक हर चरण में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो। उम्मीदवारों के लिए बेहतर शिकायत निवारण, समय पर सूचना, तकनीकी सहायता और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता पर भी जोर दिया जा रहा है। यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो NTA की परीक्षाओं में होने वाली मानवीय और तकनीकी गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, NTA को लेकर सरकार का सुधार कार्यक्रम केवल परीक्षा के दिन की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने, उम्मीदवार की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल सुरक्षा, मूल्यांकन, परिणाम और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है। OSM प्रणाली की समीक्षा और NTA की संस्थागत मजबूती के बीच सरकार अब परीक्षा व्यवस्था में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में इन सुधारों का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि नई व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी सख्ती, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू होती हैं।




