राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित एक विशेष युवा सम्मेलन में जेनरेशन-जी (Gen Z) और जेनरेशन-अल्फा (Gen Alpha) के विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के वार्षिक चैंपियनशिप सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में होने वाले इस आयोजन में देश के 100 से अधिक शहरों से आए करीब 2,000 छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। प्रतिभागियों की आयु मुख्य रूप से 15 से 19 वर्ष के बीच है और वे विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इस वर्ष सम्मेलन का केंद्रीय विषय “द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड, द इंडियन वे” रखा गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के साथ नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण, वैश्विक चुनौतियों, लोकतंत्र, सामाजिक जिम्मेदारी और भारत की सांस्कृतिक दृष्टि पर खुला संवाद स्थापित करना है। आयोजकों का कहना है कि आज की पीढ़ी केवल निर्देश नहीं, बल्कि तर्क, संवाद और सहभागिता चाहती है। ऐसे समय में यह कार्यक्रम युवाओं और अनुभवी नेतृत्व के बीच विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
IIMUN के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार, नेतृत्व का अर्थ केवल अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करना नहीं, बल्कि उसकी बात सुनना भी है। उन्होंने कहा कि भारत के विकास के इस महत्वपूर्ण दौर में युवाओं के साथ संवाद पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। इसी सोच के तहत मोहन भागवत को सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के लिए आमंत्रित किया गया है, जहां वे राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका और भारत के वैश्विक योगदान पर अपने विचार साझा करेंगे।
IIMUN की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी और संगठन अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है। संस्था का दावा है कि पिछले डेढ़ दशक में उसके कार्यक्रम 275 भारतीय शहरों और 40 देशों तक पहुंचे हैं तथा 7.5 करोड़ से अधिक युवाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा गया है। संगठन हर वर्ष अनेक मॉडल यूनाइटेड नेशंस सम्मेलन, नागरिक सहभागिता कार्यक्रम और नेतृत्व से जुड़े आयोजन करता है, जिनका संचालन मुख्य रूप से युवा स्वयं करते हैं।
मोहन भागवत का यह संवाद ऐसे समय हो रहा है जब हाल के दिनों में उन्होंने युवाओं के साथ संवाद और तर्कपूर्ण विचार-विमर्श की आवश्यकता पर जोर दिया था। राजनीतिक दृष्टि से भी इस कार्यक्रम पर नजर बनी हुई है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसके समय और उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह पहल नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण और वैश्विक नेतृत्व से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य फोकस युवाओं की भागीदारी, नेतृत्व क्षमता और भारत की उस भूमिका पर रहेगा, जिसके माध्यम से विश्व में सहयोग, शांति और एकता का संदेश दिया जा सके।




