पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक तस्वीर तेजी से स्पष्ट होती नजर आ रही है। विरोध प्रदर्शनों, चुनाव बहिष्कार की अपील और धांधली के आरोपों के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) निर्णायक बढ़त हासिल करती दिखाई दे रही है। शुरुआती और दूसरे चरण के नतीजों के अनुसार पार्टी ने 34 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जिससे उसके लिए सरकार बनाना लगभग तय माना जा रहा है। शेष सीटों पर मतदान और मतगणना की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मौजूदा रुझानों के आधार पर PML-N सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।
यह चुनाव ऐसे समय हुआ जब पीओके में लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने मतदान के बहिष्कार का आह्वान किया था। संगठन का आरोप है कि विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें स्थानीय जनता के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती हैं और जब तक इस व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाता, चुनाव निष्पक्ष नहीं माने जा सकते। इसी मुद्दे को लेकर कई क्षेत्रों में धरने, रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि पीओके के सर्वोच्च न्यायालय ने इन आरक्षित सीटों की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिससे चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुए।
चुनाव के दौरान कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य क्षेत्रों में पहले हुई हिंसा के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। कुछ स्थानों पर सड़कों को अवरुद्ध किए जाने और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबरें भी सामने आईं। इसके बावजूद कई निर्वाचन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जबकि क्षेत्रीय राजधानी में मतदान प्रतिशत 56 प्रतिशत से ऊपर बताया गया। चुनाव आयोग और प्रशासन ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी का संकेत बताया।
चुनाव परिणामों को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो ने चुनाव में व्यापक धांधली का आरोप लगाते हुए परिणामों को स्वीकार करने से इनकार किया है। विपक्ष का कहना है कि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और कई स्थानों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप देखने को मिला। दूसरी ओर PML-N ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि जनता ने विकास और स्थिरता के पक्ष में मतदान किया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा पीओके में कराए गए चुनावों को “दिखावटी प्रक्रिया” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान के ऐसे कदम उसकी स्थिति को बदल नहीं सकते। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की असंतुष्टि को दबाने के लिए बल प्रयोग, डराने-धमकाने और दमनात्मक उपाय अपनाए गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि PML-N की बढ़त से पीओके में नई सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है, लेकिन चुनावों को लेकर जारी विरोध, धांधली के आरोप और स्थानीय संगठनों की नाराजगी आने वाले समय में नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि विरोध प्रदर्शन जारी रहते हैं, तो क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना नई सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।




