देश में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन इसी के साथ इन सड़कों की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल भी बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रखरखाव और सड़क की सतह से संबंधित शिकायतों में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 12 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित 11,340 शिकायतें दर्ज की गईं। यह संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 7,030 शिकायतों की तुलना में काफी अधिक है। इससे पहले 2023-24 में 6,489 और 2022-23 में 7,318 शिकायतें दर्ज की गई थीं। यानी मौजूदा वित्त वर्ष में शिकायतों का आंकड़ा पिछले चार वर्षों के मुकाबले सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से राज्यसभा में दिए गए जवाब में बताया गया कि शिकायतों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रखरखाव और सड़क की राइडिंग क्वालिटी से जुड़े मामले शामिल हैं। हालांकि शिकायतों की संख्या बढ़ी है, लेकिन सरकार के अनुसार उनके निपटारे पर भी लगातार काम किया जा रहा है। 12 मार्च 2026 तक कुल 11,340 शिकायतों में से 9,977 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका था। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में 7,066 शिकायतों का समाधान किया गया था। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाती है और जहां निर्माण या रखरखाव में कमी पाई जाती है, वहां संबंधित ठेकेदार या कंसेशनायर को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाते हैं।
हाईवे से जुड़ी शिकायतों में सड़क की सतह खराब होना, गड्ढे, दरारें, सड़क का असमान होना और रटिंग जैसी समस्याएं प्रमुख हो सकती हैं। इसके अलावा लेन मार्किंग का मिटना, खराब रोड स्टड, क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर, पर्याप्त रोशनी का अभाव और जलभराव जैसी समस्याएं भी यात्रियों के लिए परेशानी पैदा करती हैं। कई बार हाईवे की सुरक्षा केवल सड़क की गुणवत्ता से प्रभावित नहीं होती, बल्कि अवैध कट, अनधिकृत पार्किंग, अतिक्रमण, गलत तरीके से बनाए गए प्रवेश और निकास बिंदु तथा खराब साइनेज भी दुर्घटना का खतरा बढ़ा देते हैं।
हाल के मामलों ने भी हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान खींचा है। नए बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट के बाद संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई और प्रभावित हिस्से की मरम्मत तक टोल वसूली रोकने जैसे कदम उठाए गए। इस तरह के मामले यह संकेत देते हैं कि नई सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद भी उसकी गुणवत्ता की लगातार निगरानी आवश्यक है।
बढ़ती शिकायतों से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI अब तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। करीब 40 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर AI आधारित डैशकैम एनालिटिक्स सिस्टम के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है। इसके तहत हाईवे पेट्रोल वाहनों में कैमरे लगाए जाएंगे, जो सड़क की स्थिति की तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से गड्ढे, सड़क में दरार, सतह की खराबी, रटिंग, फीकी लेन मार्किंग, क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर और खराब स्ट्रीट लाइट जैसी कई समस्याओं की पहचान की जा सकेगी।
नई निगरानी व्यवस्था में हाईवे का नियमित सर्वे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक सड़कों की जांच कम से कम सप्ताह में एक बार करने और रात के समय भी नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। रात में होने वाले निरीक्षण से सड़क की लाइटिंग, साइनेज, लेन मार्किंग और रोड स्टड जैसी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जलभराव, नालियों की स्थिति, सड़क किनारे बढ़ी वनस्पति और बस-बे जैसी सुविधाओं की भी निगरानी की जा सकती है।
हाईवे की स्थिति की जांच के लिए Network Survey Vehicles, ड्रोन, जियो-टैगिंग और डिजिटल एप्लिकेशन जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से सड़क के खराब हिस्सों को अधिक सटीक तरीके से चिन्हित किया जा सकता है और संबंधित एजेंसी तक जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि सड़क की समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो और रखरखाव की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बने।
दरअसल, देश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014 में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई करीब 91,287 किलोमीटर थी, जो 2025 के अंत तक बढ़कर लगभग 1,46,560 किलोमीटर हो गई। इसी अवधि में चार लेन या उससे अधिक चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई भी काफी बढ़ी है। एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क भी पहले की तुलना में कई गुना विस्तारित हुआ है। सड़क नेटवर्क के इस तेजी से विस्तार के कारण अब केवल नई सड़कें बनाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद सड़कों को लंबे समय तक सुरक्षित और बेहतर स्थिति में बनाए रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
भारी ट्रैफिक, ओवरलोडिंग, बारिश, जलभराव, खराब ड्रेनेज और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जैसी वजहें सड़क की उम्र और मजबूती को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञों के अनुसार सड़क परियोजनाओं में केवल निर्माण की गति पर ध्यान देने के बजाय डिजाइन, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण, निर्माण के दौरान निगरानी और बाद के रखरखाव को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। शिकायत आने के बाद सड़क की मरम्मत करने की बजाय तकनीक के माध्यम से संभावित खराबियों की पहले पहचान कर उनका समाधान करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी शिकायतों में 60 फीसदी से अधिक की वृद्धि ऐसे समय हुई है, जब सरकार देश में विश्वस्तरीय सड़क बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दे रही है। ऐसे में NHAI के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि निर्माण और रखरखाव की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना है। AI आधारित निगरानी, ड्रोन, सर्वे वाहनों और डिजिटल शिकायत प्रणालियों से समस्या की पहचान तो तेजी से हो सकती है, लेकिन इन तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब चिन्हित कमियों पर समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित हो।
देश में हाईवे नेटवर्क का विस्तार आर्थिक विकास, व्यापार और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी सड़क परियोजना की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि कितने किलोमीटर सड़क बनाई गई। सड़क कितनी सुरक्षित है, कितने वर्षों तक टिकाऊ रहती है, उसका रखरखाव कितना प्रभावी है और यात्रियों को कितनी बेहतर राइडिंग क्वालिटी मिलती है—ये सभी मानक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। बढ़ती शिकायतों के आंकड़े NHAI और संबंधित एजेंसियों के लिए इस दिशा में गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का संकेत दे रहे हैं।




