असम में बाढ़ से भारी नुकसान, हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित; सीएम ने बताया पुनर्वास का खर्च

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गुवाहाटी: असम में मानसून की भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई इलाकों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और चार जिलों में 1.12 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त संपत्तियों की मरम्मत के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत पड़ सकती है।

मौजूदा स्थिति में गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन चार जिलों में 1,12,700 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गोलाघाट में 65 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं, जबकि शिवसागर में करीब 20 हजार और नगांव में 16 हजार से अधिक लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। राज्य में करीब 441 गांव अभी भी पानी में घिरे हुए हैं। बाढ़ के कारण 10,879 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जबकि कई सड़कों, पुलों और तटबंधों को भी नुकसान पहुंचा है। पशुधन और पोल्ट्री पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।

नदियों का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। धानसिरी नदी गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में गंभीर बाढ़ की स्थिति में बह रही है, जबकि कुशियारा नदी श्रीभूमि में खतरे के निशान से ऊपर है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। चराइदेव, डिब्रूगढ़, जोरहाट, शिवसागर और तिनसुकिया के कुछ इलाकों में बारिश का अनुमान है, जिससे पहले से प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

असम में इस साल बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार अप्रैल से अब तक आई बाढ़ की दो प्रमुख लहरों ने राज्य के 25 जिलों, 90 राजस्व सर्किलों और 2,715 गांवों को प्रभावित किया है। इस दौरान 12 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आए और 101 लोगों की मौत हुई है। जुलाई में शुरू हुई बाढ़ की दूसरी लहर का असर फिलहाल ऊपरी असम के कई जिलों में अधिक दिखाई दे रहा है।

प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने पांच जिलों में 92 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों के जरिए करीब 30,205 लोगों को सहायता दी जा रही है। राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, नमक और सरसों तेल का वितरण किया जा रहा है। सरकार ने प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक करीब 65 हजार परिवारों को 15-15 हजार रुपये की तत्काल राहत राशि दी जा चुकी है, जबकि अन्य प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें भी सहायता देने की प्रक्रिया जारी है।

अब सरकार का ध्यान बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि प्रभावित लोगों को दोबारा सामान्य जीवन में लाने और क्षतिग्रस्त संपत्तियों की मरम्मत के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत पड़ सकती है। नुकसान का वास्तविक आकलन करने के लिए 9 अगस्त से सर्वेक्षण अभियान तेज किया गया है। शुरुआती चरण में करीब 8,000 परिवारों का सर्वे किया जा चुका है और लगभग 150 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान सामने आया है। सरकार का लक्ष्य ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित जिलों में करीब 50 हजार से 60 हजार परिवारों का सर्वे पूरा करना है। यह प्रक्रिया 30 अगस्त तक जारी रहने की उम्मीद है।

सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि राहत और मुआवजे की प्रक्रिया में वास्तविक प्रभावित परिवारों का नाम छूटे नहीं। साथ ही गलत दावों को रोकने के लिए सर्वेक्षण के आंकड़ों की जांच और सत्यापन किया जाएगा। घरों के अलावा फसल, पशुधन, हथकरघा तथा सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को उनकी क्षति के आधार पर सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।

बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में 793 प्रभावित स्कूलों को मरम्मत के लिए दो-दो लाख रुपये की सहायता दी गई है और अधिकांश स्कूलों को फिर से खोल दिया गया है। प्रभावित विद्यार्थियों को नई किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह 494 क्षतिग्रस्त आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 11.3 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों को जल्द दोबारा शुरू करना है, ताकि बच्चों और परिवारों को मिलने वाली जरूरी सेवाएं बाधित न रहें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ राहत कोष में करीब 142 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के बीमा दावों तथा ऋण संबंधी राहत और मोरेटोरियम की मांगों पर भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास में केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी है। राज्य सरकार अब विस्तृत नुकसान का आकलन तैयार कर केंद्र से पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता मांगने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

फिलहाल असम के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी कुछ कम होने के संकेत हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई गांव अभी भी जलमग्न हैं और नदियों का जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम विभाग की ओर से बारिश का पूर्वानुमान होने के कारण प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ बाढ़ से तबाह हुए घरों, खेतों, सड़कों, तटबंधों और सार्वजनिक संस्थानों को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में सर्वेक्षण और नुकसान के आकलन के आधार पर पुनर्वास की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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