उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के दायरे को व्यापक करने का फैसला किया है। अब इस योजना का लाभ केवल मेधावी छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। सरकार की इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक आने-जाने में सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना के लिए सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसके तहत प्रदेश की 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद और वितरण की प्रक्रिया जिला स्तर पर किए जाने की योजना है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार अतिरिक्त बजट की व्यवस्था भी कर सकती है। फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग ने योजना के लिए पात्र छात्राओं का विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों से जरूरी जानकारी मांगी जा रही है।
योजना में मेधावी छात्राओं के चयन के लिए मेरिट को प्रमुख आधार बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली छात्राओं में कॉलेज स्तर पर शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को योजना में शामिल किया जाना है। विभाग की ओर से 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं का विवरण भी जुटाया जा रहा है। हालांकि अंतिम पात्रता और चयन प्रक्रिया सरकार की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर ही तय होगी।
सरकार ने योजना में निराश्रित छात्राओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। ऐसी छात्राएं जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो चुकी है और उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाला परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं है, उन्हें निराश्रित श्रेणी में लाभ दिया जा सकता है। इस श्रेणी की छात्राओं को सामान्य मेधावी छात्राओं के लिए निर्धारित अंक और आय संबंधी शर्तों से अलग प्रावधान के तहत लाभ देने की व्यवस्था की गई है। इससे आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच पढ़ाई कर रही छात्राओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
दिव्यांग छात्राओं के लिए भी योजना में विशेष प्रावधान किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाणित होने वाली पात्र छात्राओं को योजना में शामिल किया जाएगा। मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी और हीमोफिलिया जैसी स्थितियों से प्रभावित छात्राओं के लिए भी प्रावधान किया गया है। संबंधित छात्रा की दृष्टि और मानसिक स्थिति ठीक होने तथा मोटराइज्ड वाहन चलाने में सक्षम होने जैसी शर्तें भी लागू होंगी। दिव्यांगता का प्रमाण मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होना जरूरी होगा।
योजना का लाभ केवल सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, राजकीय डिग्री कॉलेजों, सहायता प्राप्त कॉलेजों और निजी डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली पात्र छात्राओं को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। योजना के लिए छात्रा का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक होगा और पात्रता का निर्धारण संबंधित शैक्षणिक एवं श्रेणीगत मानकों के आधार पर किया जाएगा।
सरकार की योजना में छात्राओं को केवल स्कूटी उपलब्ध कराने के बजाय उससे जुड़ी कुछ अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वाहन का पंजीकरण, व्यापक बीमा, आईएसआई मार्क वाला हेलमेट और जरूरी एक्सेसरीज भी दी जाएंगी। स्कूटी सौंपते समय चार लीटर पेट्रोल उपलब्ध कराने का भी प्रावधान बताया गया है, जिससे लाभार्थी छात्रा वाहन को अपने घर तक आसानी से ले जा सके।
योजना को लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से छात्राओं का डाटा मांगा है। वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं की शैक्षणिक जानकारी के साथ पात्रता से संबंधित विवरण जुटाया जा रहा है। विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रकों समेत संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से डाटा उपलब्ध कराने में तेजी लाने के लिए ऑनलाइन माध्यम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि स्कूटी मिलने से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की छात्राओं को काफी मदद मिलेगी। कई छात्राओं को कॉलेज पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और सार्वजनिक परिवहन की सीमित सुविधा के कारण उन्हें पढ़ाई जारी रखने में परेशानी होती है। निजी वाहन उपलब्ध होने से कॉलेज आने-जाने में समय और परिवहन की समस्या कम हो सकती है। इससे उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने और पढ़ाई बीच में छोड़ने की संभावना कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर सरकार की ओर से पहले भी मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने की बात कही गई थी। बाद में योजना के दायरे और चयन व्यवस्था को लेकर बदलाव किए गए ताकि इसका लाभ अलग-अलग वर्गों की अधिक छात्राओं तक पहुंच सके। अब निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को शामिल किए जाने से योजना का सामाजिक दायरा और व्यापक हो गया है।
फिलहाल योजना को लेकर छात्राओं के डाटा संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जानकारी मिलने के बाद पात्र छात्राओं की सूची तैयार की जाएगी और उसके आधार पर आगे की वितरण प्रक्रिया शुरू होगी। छात्राओं को सलाह दी जाती है कि वे शैक्षणिक प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और यदि लागू हो तो दिव्यांगता या निराश्रित श्रेणी से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें। आवेदन, चयन और स्कूटी वितरण की अंतिम तारीखों के लिए उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, योगी सरकार की यह पहल मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। करीब 400 करोड़ रुपये के बजट और 50 हजार से अधिक छात्राओं को लाभ पहुंचाने की तैयारी के बीच निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों को योजना में जगह मिलने से इसका दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हुआ है।




