अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ताक्सिंग क्षेत्र में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कथित गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने क्षेत्र का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कुछ महत्वपूर्ण पेट्रोलिंग प्वाइंट्स तक भारतीय सुरक्षा बलों की पहुंच प्रभावित हुई है। समिति के मुताबिक, सीमा से लगे कुछ इलाकों में स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सीमित हुई है और चीनी गतिविधियों को लेकर क्षेत्र के लोगों में चिंता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और भारतीय रक्षा अधिकारियों ने हाल में सामने आई कुछ रिपोर्टों को अपुष्ट बताया है।
PPA की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने 10 जुलाई 2026 को ताक्सिंग क्षेत्र का दौरा किया था। टीम का नेतृत्व पार्टी के मुख्य सलाहकार और पूर्व मंत्री कहफा बेंगिया ने किया। उनके साथ PPA के उपाध्यक्ष कलिंग जेरांग तथा पार्टी के सचिव सोरांग कियोकाम और नराह जिमी शामिल थे। टीम ने ताक्सिंग के अलावा माजा और गैलेमो इलाकों का भी दौरा किया। इस दौरान स्थानीय नेताओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों से बातचीत करने के साथ-साथ क्षेत्र में तैनात सुरक्षा अधिकारियों और सैनिकों से भी जानकारी लेने का दावा किया गया।
फैक्ट-फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट में शेरा-5 पेट्रोलिंग प्वाइंट को लेकर सबसे गंभीर चिंता जताई गई है। PPA के अनुसार, यह भारतीय सीमा निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान है। समिति को स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया गया कि वर्ष 2023 में इस इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। इसके बाद भारतीय सैनिकों की नियमित पेट्रोलिंग वहां प्रभावित हुई। PPA का आरोप है कि बाद में PLA के जवानों ने इलाके में मौजूद भारतीय प्रतीकों या संरचनाओं को हटा दिया और भारतीय गश्ती दलों की वहां तक पहुंच बाधित हो गई। हालांकि, इन दावों को भारतीय सेना की ओर से स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में नांगा पहाड़ को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। PPA का कहना है कि यह इलाका स्थानीय नाह और मारा समुदायों के लिए पारंपरिक रूप से शिकार और याक पालन से जुड़ा रहा है। समिति के मुताबिक, अब स्थानीय लोगों की वहां आवाजाही सीमित हो गई है। PPA ने आशंका जताई है कि यदि सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय समुदायों की नियमित गतिविधियां कम होती हैं तो इससे जमीन पर स्थिति की निगरानी और सीमा सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में सीमा क्षेत्र में भारतीय पेट्रोलिंग की मौसमी चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया है। PPA के अनुसार, ताक्सिंग जैसे अत्यधिक दुर्गम इलाकों में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण नियमित पेट्रोलिंग कठिन हो जाती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियां मुख्य रूप से अप्रैल से अक्टूबर के बीच अधिक होती हैं, जबकि सर्दियों के दौरान मौसम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों के कारण अग्रिम क्षेत्रों में पहुंच चुनौतीपूर्ण हो जाती है। समिति ने यह भी दावा किया कि स्थानीय पोर्टरों की उपलब्धता सर्दियों में कम हो जाती है। PPA का आरोप है कि इसके विपरीत PLA पूरे साल अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है।
सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी PPA की प्रमुख मांगों में शामिल है। समिति ने नाचो से ताक्सिंग तक Border Roads Organisation (BRO) की सड़क परियोजना में तेजी लाने की जरूरत बताई है। इसके अलावा गैलेमो से पोकोरला के बीच प्रस्तावित लगभग 68 किलोमीटर लंबी सड़क और ताक्सिंग-पोकोरला मार्ग को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। PPA का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी और सीमावर्ती गांवों तक आवश्यक सेवाएं भी तेजी से पहुंचाई जा सकेंगी।
समिति ने अग्रिम क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की भी सिफारिश की है। PPA ने सिपी-2 में हेलिपैड और सिपी-4 तथा सिपी-6 में स्थायी सैन्य बेस स्थापित करने की मांग की है। इसके अलावा माजा और गैलेमो जैसे अग्रिम क्षेत्रों में नियमित बिजली आपूर्ति तथा बेहतर टेलीफोन और मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। पार्टी का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में मजबूत बुनियादी ढांचा न केवल स्थानीय लोगों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि सुरक्षा बलों की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी मजबूत करेगा।
हालांकि, ताक्सिंग में चीनी घुसपैठ को लेकर सामने आई खबरों पर आधिकारिक रुख PPA के दावों से अलग है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पहले ताक्सिंग में नई चीनी घुसपैठ की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि वास्तविक स्थिति की पुष्टि भारतीय सेना और स्थानीय लोगों से जानकारी लेने के बाद की जाएगी। भारतीय रक्षा पक्ष की ओर से भी हालिया तनाव से जुड़ी कुछ खबरों को अपुष्ट बताया गया है। इसलिए PPA की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दल की ओर से प्रस्तुत जमीनी आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि आधिकारिक रूप से प्रमाणित सैन्य तथ्य के रूप में।
ताक्सिंग की संवेदनशीलता को भारत-चीन सीमा विवाद के व्यापक संदर्भ में समझना जरूरी है। अरुणाचल प्रदेश लंबे समय से चीन के क्षेत्रीय दावे का केंद्र रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई हिस्सों में दोनों देशों की धारणा अलग-अलग होने के कारण ऐसे क्षेत्रों में पेट्रोलिंग और सीमा प्रबंधन को लेकर समय-समय पर तनाव सामने आता रहा है।
भारत-चीन सीमा पर वर्ष 2020 के बाद से स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील रही है। पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। बाद के वर्षों में दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की। ऐसे माहौल में अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ी किसी भी रिपोर्ट को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल ताक्सिंग को लेकर तस्वीर दो अलग-अलग दावों के बीच बनी हुई है। PPA की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने शेरा-5, नांगा पहाड़ और अन्य अग्रिम क्षेत्रों में कथित चीनी गतिविधियों तथा भारतीय पेट्रोलिंग से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, भारतीय रक्षा अधिकारियों ने हालिया घुसपैठ संबंधी खबरों की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि ताक्सिंग में चीन ने किसी बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, PPA द्वारा उठाए गए सीमा बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, संचार और नियमित पेट्रोलिंग से जुड़े मुद्दे यह संकेत देते हैं कि इस दुर्गम क्षेत्र में निगरानी और कनेक्टिविटी को मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है।




