हंगामे के बीच खत्म हुआ संसद का मानसून सत्र, 12 विधेयक पारित; रिजिजू ने दिया पूरा हिसाब

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संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र राजनीतिक टकराव, विपक्ष के विरोध और सदन में बार-बार हुए व्यवधान के कारण काफी चर्चा में रहा। सत्र के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद की मंजूरी दिलाने में सफलता हासिल की, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदनों में अपेक्षित स्तर पर चर्चा और कामकाज नहीं हो सका। सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से पूरे सत्र के कामकाज का ब्योरा साझा किया और विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में 12 विधेयक पारित किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष के विरोध और लगातार व्यवधान के कारण संसद का काफी समय प्रभावित हुआ। रिजिजू ने यह भी दावा किया कि लोकसभा में पारित 12 विधेयकों में से केवल एक विधेयक पर पूरी तरह चर्चा हो सकी। उनके मुताबिक, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर अपेक्षाकृत विस्तृत चर्चा हुई।

मानसून सत्र में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने से संबंधित कानून में संशोधन भी महत्वपूर्ण रहा। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और संगठित तरीके से होने वाली अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया गया। इस विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

सत्र की उत्पादकता को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री के समापन संबंधी बयानों पर आधारित रिपोर्टों में राज्यसभा की उत्पादकता करीब 39 प्रतिशत बताई गई है, जबकि लोकसभा की उत्पादकता को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 19 प्रतिशत और 31 प्रतिशत के आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए लोकसभा की उत्पादकता का आंकड़ा प्रकाशित करते समय स्रोत का स्पष्ट उल्लेख करना जरूरी है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि बार-बार के स्थगन और हंगामे ने दोनों सदनों के निर्धारित कामकाज को काफी प्रभावित किया।

रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही को लगातार बाधित करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार चाहती थी कि संसद में विधेयकों और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो तथा अधिक से अधिक सांसद इसमें हिस्सा लें, लेकिन लगातार विरोध के कारण इस उद्देश्य को नुकसान पहुंचा।

मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक विवाद का प्रमुख कारण रहे। विपक्ष ने NEET समेत छात्रों से संबंधित मुद्दों पर सरकार से जवाब और चर्चा की मांग की। विपक्ष की ओर से इन विषयों को संसद में उठाने पर जोर दिया गया, जबकि सरकार ने कहा कि वह संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद कई मौकों पर सदन की कार्यवाही पर भी दिखाई दिए।

इस पूरे सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप लगातार चलता रहा कि सदन का कामकाज बाधित करने के लिए कौन जिम्मेदार है। सरकार ने जहां विधेयकों के पारित होने को अपनी उपलब्धि बताया, वहीं विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने का आरोप लगाया। यही वजह है कि मानसून सत्र की समीक्षा केवल पारित विधेयकों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि संसद में हुई बहस और सदन के वास्तविक कामकाज के आधार पर भी की जा रही है।

कुल मिलाकर, संसद का मानसून सत्र 2026 विधायी गतिविधियों और राजनीतिक गतिरोध दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहा। सरकार ने कई विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की, लेकिन कम उत्पादकता और लगातार व्यवधान के कारण संसदीय बहस की गुणवत्ता पर सवाल भी उठे। सत्र समाप्त होने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि पारित कानूनों को किस तरह लागू किया जाता है और मानसून सत्र में लंबित रह गए मुद्दों पर अगले सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच किस तरह की चर्चा होती है।

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