पुराना सीमा विवाद फिर बना तनाव की वजह, असम-अरुणाचल बॉर्डर पर हालात बिगड़े

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असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। असम के धेमाजी जिले के सीमावर्ती इलाके में जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। घटना के बाद दोनों राज्यों के प्रशासन ने स्थिति को संभालने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है।

मौजूदा विवाद की शुरुआत कथित तौर पर जमीन पर अतिक्रमण और उसके अधिकार को लेकर हुई। 10 अगस्त को असम के धेमाजी जिले के मिंगमांग क्षेत्र में कथित गोलीबारी की घटना सामने आई थी। इस घटना में कई ग्रामीणों के घायल होने की खबर सामने आई। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी।

गोलीबारी की घटना के विरोध में असम के छात्र संगठन ताकाम मिसिंग पोरिन केबांग ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान किया। इसके बाद दोनों राज्यों की सीमा से जुड़े इलाकों में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए। प्रदर्शनकारियों के आमने-सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

13 अगस्त को धेमाजी के सिलापाथर इलाके में लिकाबाली प्रवेश बिंदु के पास तनाव और बढ़ गया। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ओर के प्रदर्शनकारियों के आमने-सामने आने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने और किसी बड़े टकराव को रोकने के लिए हवा में फायरिंग की। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम को दोनों राज्यों की पुलिस के बीच सीधे संघर्ष के रूप में नहीं देखा जा रहा है। विवाद मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर जमीन और कथित अतिक्रमण के मुद्दे से शुरू हुआ, जिसके बाद विरोध-प्रदर्शन और स्थानीय लोगों के बीच तनाव बढ़ा। प्रशासन की चुनौती अब यह है कि स्थानीय विवाद को व्यापक अंतरराज्यीय टकराव में बदलने से रोका जाए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने घटना के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने दोनों राज्यों के लोगों के बीच पुराने संबंधों और आपसी भाईचारे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और आपसी समझ से किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तनाव को और बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचने का आग्रह किया।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी शांति और आपसी सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की सकारात्मक टिप्पणियों का स्वागत किया और दोनों राज्यों के लोगों के बीच सौहार्द बनाए रखने की जरूरत बताई। दोनों मुख्यमंत्रियों के बयानों से संकेत मिलता है कि सरकारें मौजूदा तनाव को बढ़ने से रोकने और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के पक्ष में हैं।

10 अगस्त की घटना के बाद दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच संपर्क भी बढ़ाया गया। असम सरकार की ओर से अरुणाचल प्रदेश प्रशासन से घटना की जांच और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का आग्रह किया गया। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस अधिकारी भी एक-दूसरे के संपर्क में बताए गए हैं, ताकि सीमा क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। दोनों राज्यों के बीच लगभग 804 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है। प्रशासनिक पुनर्गठन के दौर से ही कई सीमावर्ती गांवों और इलाकों के अधिकार को लेकर विवाद रहा है। अलग-अलग समय पर सीमा के आसपास जमीन के इस्तेमाल, गांवों के प्रशासनिक अधिकार और कथित अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद सामने आते रहे हैं।

इस पुराने विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2022 में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच बातचीत के बाद नामसाई घोषणा के जरिए विवादित गांवों की संख्या कम करने की दिशा में सहमति बनी। इसके बाद अप्रैल 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। इसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालना था।

हालांकि समझौते के बावजूद जमीनी स्तर पर सीमा की पहचान, जमीन के अधिकार और कथित अतिक्रमण जैसे मुद्दे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन से जुड़ा कोई स्थानीय विवाद जल्दी ही दो राज्यों के लोगों के बीच तनाव का रूप ले सकता है। हाल की घटना भी इसी संवेदनशीलता को सामने लाती है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखना और दोनों पक्षों के लोगों को आमने-सामने आने से रोकना है। सुरक्षा बलों की तैनाती और अधिकारियों के बीच बातचीत के साथ स्थिति पर नजर रखी जा रही है। दोनों मुख्यमंत्रियों की शांति अपील के बीच अब यह महत्वपूर्ण होगा कि हालिया विवाद की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों राज्यों के प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के जरिए तनाव को जल्द समाप्त किया जा सकता है।

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