उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टीएचडीसी सुरंग में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। पीपलकोटी क्षेत्र में स्थित सुरंग में काम के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और पत्थर घुसने से कई श्रमिक अंदर फंस गए। हादसे के बाद सुरंग में अफरा-तफरी मच गई। राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर श्रमिकों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और फंसे श्रमिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए अंतिम संख्या प्रशासन की विस्तृत पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए राहत और बचाव अभियान की लगातार निगरानी की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण कर रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों से मौके की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। वह हादसे में घायल श्रमिकों से भी मुलाकात कर उनका हाल जानने और उनके इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक, सुरंग में श्रमिक निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ सुरंग के एक हिस्से से पानी और मलबा तेजी से अंदर आया। पानी और मलबे के तेज बहाव की वजह से श्रमिकों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग इसकी चपेट में आ गए। कुछ श्रमिकों ने बताया कि हादसे के दौरान सुरंग के भीतर काफी अंधेरा और अफरा-तफरी का माहौल था। मलबे और पानी के कारण बाहर निकलने का रास्ता भी प्रभावित हुआ, जिससे बचाव अभियान को चुनौती का सामना करना पड़ा।
हादसे के बाद घायल श्रमिकों को तत्काल बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कई श्रमिक घायल हुए हैं और कुछ लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है। गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने की जानकारी है। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि प्रशासन घायल श्रमिकों के इलाज और उनके परिजनों से समन्वय की व्यवस्था कर रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF, पुलिस, सेना और ITBP समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें जुटी हुई हैं। सुरंग के अंदर जमा पानी को बाहर निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं, जबकि मलबा हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बचाव दल बेहद सावधानी के साथ सुरंग के अंदर आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में दोबारा मलबा गिरने और पानी आने का खतरा बना हुआ है।
इस हादसे ने उत्तराखंड की पहाड़ी परियोजनाओं और सुरंग निर्माण में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबा आने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की ओर से घटना के कारणों की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि हादसे के समय सुरंग में सुरक्षा के लिए निर्धारित व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं या नहीं।
हादसे की खबर के बाद श्रमिकों के परिवारों में चिंता का माहौल है। अलग-अलग राज्यों से काम करने आए श्रमिकों के परिजन प्रशासन से लगातार जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार की ओर से उन्हें हर संभव मदद और जानकारी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाए और जरूरत के अनुसार उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाए।
फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग में फंसे श्रमिकों का सुरक्षित पता लगाना और उन्हें बाहर निकालना है। राहत एवं बचाव अभियान को लगातार तेज किया जा रहा है और मौके पर मौजूद एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग में मौजूद सभी संभावित स्थानों की जांच की जा रही है। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में प्रभावित श्रमिकों की अंतिम संख्या और घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।




