दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के संघीय कर्ज ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक तरफ सरकारी खर्च कम करने और अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ टैक्स कटौती, रक्षा खर्च और ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण राजकोषीय दबाव बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के लिए केवल ट्रंप की मौजूदा नीतियों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी कर्ज में लंबे समय से लगातार बढ़ोतरी होती रही है।
अमेरिका के कुल कर्ज में सरकार की जनता और वित्तीय बाजारों के प्रति देनदारी के साथ-साथ सरकारी खातों के बीच मौजूद देनदारियां भी शामिल हैं। अगस्त 2026 तक लगभग 32.3 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज जनता के पास था, जबकि करीब 7.8 ट्रिलियन डॉलर अंतर-सरकारी देनदारियों के रूप में था। इस तरह कुल रकम 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गई। यह आंकड़ा 2017 के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है, जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने थे। हालांकि इस पूरी अवधि में कर्ज बढ़ने की कहानी कई प्रशासन और कई अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई है। कोरोना महामारी के दौरान किए गए बड़े पैमाने के सरकारी खर्च ने भी अमेरिकी कर्ज में भारी इजाफा किया था।
अमेरिकी कर्ज में मौजूदा बढ़ोतरी को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि सरकार हर साल कितना खर्च करती है और उसकी आय कितनी है। जब सरकारी खर्च राजस्व से लगातार अधिक रहता है, तो बजट घाटा पैदा होता है और उस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। अमेरिकी कांग्रेस की गैर-पक्षपाती संस्था Congressional Budget Office (CBO) ने फरवरी 2026 में अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2026 में अमेरिकी बजट घाटा करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर रहेगा। CBO के अनुसार यह घाटा 2036 तक बढ़कर करीब 3.1 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है।
अमेरिका की कर्ज समस्या में बढ़ता ब्याज खर्च सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बन चुका है। सरकार को पुराने कर्ज पर लगातार ब्याज चुकाना पड़ता है और जैसे-जैसे कर्ज की रकम बढ़ती है, ब्याज का बोझ भी बढ़ता जाता है। CBO के अनुमान के मुताबिक 2026 में अमेरिकी सरकार का शुद्ध ब्याज खर्च लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है। 2036 तक इसके बढ़कर करीब 2.1 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यानी आने वाले वर्षों में अमेरिकी बजट का बड़ा हिस्सा विकास, रक्षा या अन्य योजनाओं पर खर्च होने के बजाय पुराने कर्ज की ब्याज देनदारी पूरी करने में जा सकता है।
अब सवाल उठता है कि ट्रंप की नीतियों ने इस कर्ज को कितना बढ़ाया है? इसका जवाब सीधा नहीं है। अमेरिका की कर्ज समस्या ट्रंप के वर्तमान कार्यकाल से काफी पुरानी है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों सरकारों के कार्यकाल में कर्ज बढ़ा है। कोरोना महामारी के दौरान तत्कालीन ट्रंप और बाद में जो बाइडन प्रशासन के समय बड़े राहत पैकेजों और सरकारी खर्च ने भी कर्ज को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा लंबे समय से टैक्स राजस्व और सरकारी खर्च के बीच असंतुलन बना हुआ है। इसलिए 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को केवल मौजूदा राष्ट्रपति की नीतियों का परिणाम बताना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
फिर भी ट्रंप प्रशासन की टैक्स कटौती की नीतियां आने वाले वर्षों के घाटे पर असर डाल सकती हैं। सरकार जब टैक्स में कटौती करती है और उसके बराबर खर्च में कमी नहीं करती, तो राजस्व घटने के कारण बजट घाटा बढ़ सकता है। ट्रंप प्रशासन के बड़े टैक्स और खर्च कानून को लेकर बजट विशेषज्ञों ने इसी तरह की चिंता जताई है। इसका असर तत्काल कुल कर्ज के आंकड़े में पूरी तरह दिखाई देने के बजाय आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ते घाटे और अतिरिक्त उधारी के रूप में सामने आता है।
टैक्स कटौती का समर्थक पक्ष यह तर्क देता है कि कम टैक्स से कारोबार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। अगर अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है तो सरकार को अधिक टैक्स राजस्व भी मिल सकता है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यदि टैक्स कटौती से होने वाली राजस्व कमी की भरपाई खर्च में कटौती या पर्याप्त आर्थिक वृद्धि से नहीं होती, तो सरकार को अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ेगा। यही वजह है कि अमेरिकी बजट को लेकर टैक्स नीति पर राजनीतिक बहस लगातार तेज बनी हुई है।
अमेरिका के कर्ज की दूसरी बड़ी वजह Social Security और Medicare जैसे सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम हैं। अमेरिका में बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है और इन कार्यक्रमों पर सरकारी खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। CBO के अनुसार आने वाले वर्षों में अनिवार्य सरकारी खर्च बढ़ने के प्रमुख कारणों में Social Security और Medicare का बढ़ता खर्च शामिल है। इसका अर्थ यह है कि कर्ज की समस्या केवल टैक्स कटौती या रक्षा बजट से जुड़ी नहीं है, बल्कि अमेरिकी सरकार की लंबे समय से चली आ रही खर्च संरचना भी इसके पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ईरान युद्ध ने भी अमेरिका के राजकोषीय दबाव को बढ़ाया है। 2026 में ईरान के साथ सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका के रक्षा और सैन्य अभियान से जुड़े खर्च में अतिरिक्त दबाव आया है। सैनिकों की तैनाती, हथियारों और मिसाइलों का इस्तेमाल, सैन्य लॉजिस्टिक्स तथा मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की लागत युद्ध के लंबे खिंचने के साथ बढ़ सकती है। मौजूदा रिपोर्टों में ईरान युद्ध को अमेरिकी रक्षा खर्च और बजट पर अतिरिक्त दबाव डालने वाले कारकों में शामिल किया गया है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज का मुख्य कारण ईरान युद्ध नहीं है। अमेरिका का कर्ज युद्ध शुरू होने से पहले ही तेजी से बढ़ रहा था। ईरान युद्ध ने इस समस्या में एक नया खर्च जरूर जोड़ा है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे बजट घाटे, Social Security और Medicare जैसे कार्यक्रमों का खर्च तथा ब्याज भुगतान कहीं अधिक व्यापक और संरचनात्मक कारण हैं। इसलिए युद्ध को पूरे कर्ज संकट की अकेली वजह बताना आंकड़ों के अनुरूप नहीं होगा।
इसके अलावा अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीति भी राजस्व और कर्ज के समीकरण को प्रभावित कर रही है। ट्रंप प्रशासन ने आयात पर कई तरह के शुल्क लगाए, जिनसे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद थी। लेकिन टैरिफ से जुड़े कानूनी और नीतिगत बदलावों ने राजस्व अनुमानों में अनिश्चितता पैदा की है। CBO ने मार्च 2026 में बताया था कि कम टैरिफ राजस्व के कारण सरकार को अधिक उधारी लेनी पड़ सकती है और इससे 2026 से 2036 के बीच ब्याज खर्च भी बढ़ सकता है।
कर्ज बढ़ने का असर केवल सरकारी खातों तक सीमित नहीं रहता। सरकार को ज्यादा रकम उधार लेने के लिए अधिक सरकारी बॉन्ड जारी करने पड़ सकते हैं। यदि निवेशक ज्यादा ब्याज की मांग करते हैं, तो सरकार की उधारी लागत बढ़ती है। हाल के दिनों में अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड को लेकर चिंता बढ़ी है। ट्रेजरी ने बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए बॉन्ड बायबैक बढ़ाने की योजना भी घोषित की है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम संरचनात्मक बजट घाटे की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं।
कर्ज का बढ़ता बोझ भविष्य की अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है। CBO के अनुसार जनता के पास मौजूद संघीय कर्ज 2025 के अंत में GDP के करीब 99 प्रतिशत से बढ़कर 2036 में लगभग 120 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं इसी अवधि में घाटा भी ऐतिहासिक औसत की तुलना में काफी ऊंचा रहने का अनुमान है। CBO का आकलन है कि लगातार बड़े घाटे और बढ़ते ब्याज खर्च से अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता रहेगा।
फिर भी 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अमेरिका तत्काल आर्थिक संकट या दिवालियापन की स्थिति में पहुंच गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार बहुत बड़ा है और अमेरिकी डॉलर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में प्रमुख रिजर्व मुद्रा है। अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित निवेश साधनों में गिनी जाती हैं। लेकिन लगातार बढ़ता कर्ज सरकार की वित्तीय गुंजाइश को सीमित कर सकता है और आर्थिक मंदी, युद्ध या किसी अन्य बड़े संकट की स्थिति में सरकार के लिए नई राहत योजनाएं चलाना महंगा बना सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी कर्ज की मौजूदा स्थिति को एक राष्ट्रपति, एक युद्ध या एक टैक्स कानून से नहीं समझा जा सकता। ट्रंप प्रशासन की टैक्स कटौती और रक्षा संबंधी नीतियां आने वाले वर्षों में घाटे को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि ईरान युद्ध ने रक्षा खर्च पर अतिरिक्त दबाव डाला है। लेकिन अमेरिकी कर्ज की बुनियादी समस्या लंबे समय से चले आ रहे राजकोषीय असंतुलन, बढ़ते अनिवार्य खर्च और ब्याज भुगतान से जुड़ी है।
आगे अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह राजस्व बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने के बीच संतुलन कैसे बनाए। टैक्स बढ़ाने का फैसला राजनीतिक रूप से कठिन हो सकता है, जबकि Social Security, Medicare और रक्षा जैसे बड़े खर्चों में कटौती भी आसान नहीं होगी। दूसरी ओर लगातार बढ़ता ब्याज खर्च सरकार के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। CBO के अनुमानों के मुताबिक ब्याज भुगतान 2036 तक 2.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसलिए अमेरिकी कर्ज की समस्या का समाधान किसी एक फैसले से नहीं बल्कि लंबे समय की व्यापक राजकोषीय रणनीति से ही संभव होगा।




