जापान से आएगा बड़ा निवेश? भारत ने मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी पर बढ़ाया फोकस

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भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जापान के दौरे पर हैं और उनके साथ 200 से अधिक सदस्यों वाला भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, स्टील, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप सहित कई क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं। भारत का मुख्य उद्देश्य जापानी कंपनियों से अधिक निवेश हासिल करना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई तक पहुंचाना है।

जापान में आयोजित एक कारोबारी कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों से भारत में अपने कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देने की अपील की। उन्होंने भारत में सुजुकी की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में मौजूद लगभग 1,580 जापानी कंपनियों को भी इसी तरह सफल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों के रूप में विकसित होने की कोशिश करनी चाहिए। गोयल के इस बयान का व्यापक संदेश यह है कि जापानी कंपनियां भारत को केवल एक बिक्री बाजार के रूप में न देखें, बल्कि यहां उत्पादन, अनुसंधान, तकनीक और निर्यात का बड़ा केंद्र विकसित करें।

पीयूष गोयल ने भारत की युवा आबादी को जापानी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत की कामकाजी आबादी की औसत उम्र 30 वर्ष से कम है और आने वाले वर्षों में देश के पास बड़ा युवा कार्यबल उपलब्ध रहेगा। भारत का विशाल घरेलू बाजार और युवा श्रमशक्ति जापान की तकनीकी विशेषज्ञता तथा पूंजी के साथ मिलकर दोनों देशों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकती है। सरकार इसी तालमेल के जरिए भारत में रोजगार, उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही है।

गोयल ने भारत में सुजुकी के लंबे कारोबारी सफर को जापानी निवेश की सफलता के उदाहरण के तौर पर पेश किया। सुजुकी ने भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाई है और इसके जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार, सप्लायर नेटवर्क और उत्पादन क्षमता विकसित हुई है। सरकार चाहती है कि भारत में मौजूद दूसरी जापानी कंपनियां भी इसी तरह दीर्घकालिक निवेश करें और यहां से भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन करें। इसी संदर्भ में मंत्री ने लगभग 1,580 जापानी कंपनियों को ‘सुजुकी जैसी सफलता’ हासिल करने का आह्वान किया।

भारत में जापानी कंपनियों की मौजूदगी पहले से ही मजबूत है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 1,500 से अधिक जापानी कंपनियां पंजीकृत हैं और इनके हजारों कारोबारी प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में इन कंपनियों की विशेष भूमिका है। ऑटोमोबाइल के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी जापानी कंपनियां भारत में सक्रिय हैं।

निवेश के आंकड़े भी भारत-जापान आर्थिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाते हैं। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच जापान से भारत में लगभग 48 अरब डॉलर का FDI इक्विटी निवेश आया है। इस लिहाज से जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में भी जापानी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। भारत सरकार अब मौजूदा निवेश को बनाए रखने के साथ-साथ नई कंपनियों और नए क्षेत्रों से निवेश आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

भारत-जापान आर्थिक साझेदारी के लिए आने वाला दशक भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में जापान की ओर से अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य सामने आया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों को भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत का जोर अब केवल विदेशी पूंजी हासिल करने पर नहीं है। सरकार चाहती है कि जापानी निवेश के साथ नई तकनीक, कौशल विकास, रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन भी भारत आए। इससे भारतीय कंपनियों को जापानी तकनीक और प्रबंधन विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है और देश में बनने वाले उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। सरकार जापानी कंपनियों को भारत में रिसर्च एवं डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र स्थापित करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।

सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल, बैटरी, क्लीन एनर्जी, फार्मास्यूटिकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश की संभावनाएं विशेष रूप से देखी जा रही हैं। भारत में तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार और बड़े पैमाने पर ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचे की जरूरत जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। दूसरी ओर, जापान के पास अत्याधुनिक तकनीक, पूंजी और उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक अनुभव की मजबूत क्षमता है।

भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर भी सरकार का जोर है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर रहा। भारत का मानना है कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं की क्षमता को देखते हुए यह आंकड़ा और बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए भारतीय उत्पादों की जापानी बाजार तक पहुंच बढ़ाने, निवेश संबंधों को मजबूत करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर चर्चा की जा रही है।

भारत-जापान सहयोग केवल कारोबार और निवेश तक सीमित नहीं है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, विभिन्न शहरों की मेट्रो परियोजनाएं और जापानी औद्योगिक टाउनशिप दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी के बड़े उदाहरण हैं। भारत में जापानी कंपनियों के लिए औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और स्थानीय रोजगार पैदा करने में भी मदद मिल रही है।

जापानी कंपनियों के लिए भारत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ा घरेलू बाजार, युवा आबादी, बढ़ता बुनियादी ढांचा और उत्पादन क्षमता मौजूद है। इसके अलावा वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने की दिशा में काम कर रही हैं, ऐसे में भारत एक महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। जापानी कंपनियों के सर्वेक्षणों में भी भारत को भविष्य के निवेश के लिए प्रमुख संभावनाशील बाजारों में लगातार महत्वपूर्ण स्थान मिलता रहा है।

पीयूष गोयल का जापान दौरा इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल जापानी उद्योग जगत, निवेशकों और कंपनियों के साथ व्यापार तथा निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहा है। भारत की कोशिश है कि जापान से आने वाला निवेश केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ाएं और देश को अपने वैश्विक कारोबार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में इस्तेमाल करें।

कुल मिलाकर, ‘1,580 सुजुकी’ का संदेश भारत-जापान आर्थिक संबंधों के विस्तार की बड़ी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां यहां दीर्घकालिक निवेश करें, स्थानीय उत्पादन और रोजगार बढ़ाएं, नई तकनीक लाएं और भारत से वैश्विक बाजारों को सेवाएं दें। यदि दोनों देशों की योजनाएं अपेक्षित गति से आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत-जापान साझेदारी निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक और निर्यात के क्षेत्र में और मजबूत हो सकती है।

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