भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की कोशिशों के बीच दोनों देशों की सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता की है। यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के किबिथू क्षेत्र के पास वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (BPM) प्वाइंट पर हुई। बैठक ऐसे समय में हुई है, जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग इलाके में सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की आमने-सामने बातचीत को सीमा पर किसी भी गलतफहमी को बढ़ने से रोकने और शांति बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया, जो भारतीय सेना की III कोर के कमांडर हैं। अरुणाचल प्रदेश में LAC की सुरक्षा के लिहाज से III कोर और IV कोर की भूमिका महत्वपूर्ण है। वाचा-दमाई में हुई बातचीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ताएं अब तक मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोल्डो क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद दोनों सेनाओं के बीच इस स्तर की वार्ता सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने और सैन्य संपर्क बनाए रखने का प्रमुख माध्यम रही है।
अरुणाचल प्रदेश में इस तरह की उच्चस्तरीय सैन्य बातचीत का अपना अलग रणनीतिक महत्व है। भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई स्थानों को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं हैं। पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिण तिब्बत के रूप में संदर्भित करता रहा है, जबकि भारत लगातार कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे माहौल में सीमा पर तैनात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच सीधा संवाद किसी स्थानीय घटना को बड़े सैन्य तनाव में बदलने से रोकने में उपयोगी हो सकता है।
वाचा-दमाई में हुई बैठक को अगस्त में भारत और चीन के बीच हुई उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद की महत्वपूर्ण सैन्य पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री तथा सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के बीच 24 और 25 अगस्त को बीजिंग में 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई थी। इस वार्ता में दोनों देशों ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बाद पूर्वी सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की बैठक होना यह संकेत देता है कि दोनों देश सीमा विवाद को संभालने के लिए कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर संपर्क बनाए रखना चाहते हैं।
भारत-चीन संबंधों में वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बड़ा बदलाव आया था। पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा और सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तथा सैन्य संसाधन तैनात किए गए। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई तथा कुछ विवादित क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का व्यापक समाधान अभी नहीं हुआ है। ऐसे में कोर कमांडर स्तर की बैठक को सीमा विवाद के अंतिम समाधान के बजाय तनाव प्रबंधन और सैन्य संचार को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखना अधिक उचित होगा।
ताकसिंग क्षेत्र को लेकर सामने आई चिंताओं के बीच वाचा-दमाई बैठक की अहमियत और बढ़ जाती है। हालांकि, बैठक के बाद अभी तक ऐसी कोई सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि ताकसिंग से जुड़े सभी मतभेदों का समाधान हो गया है। इसी तरह, किसी क्षेत्र से सैनिकों की वापसी या तैनाती में बड़े बदलाव को लेकर भी आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इस बैठक का मुख्य महत्व दोनों सेनाओं के बीच सीधे संवाद और सीमा पर स्थिति को स्थिर रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
इस बैठक का समय भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में कूटनीतिक संपर्क बढ़ा है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला जारी है। ऐसे समय में अरुणाचल प्रदेश में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बातचीत यह संकेत देती है कि सीमा पर मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष सैन्य संचार के चैनल खुले रखना चाहते हैं। खासकर LAC के संवेदनशील इलाकों में नियमित बातचीत किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में तत्काल संपर्क स्थापित करने में मदद कर सकती है।
कुल मिलाकर, वाचा-दमाई में भारत और चीन के कोर कमांडर स्तर के अधिकारियों की बातचीत पूर्वी सेक्टर में सीमा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ताकसिंग जैसे संवेदनशील इलाकों में तनाव की खबरों के बीच यह संवाद दोनों देशों के लिए स्थानीय स्तर पर स्थिति को नियंत्रित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। हालांकि, इस बैठक से सीमा विवाद का स्थायी समाधान निकलने का दावा करना अभी जल्दबाजी होगी। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष भविष्य में सैन्य संवाद को कितनी नियमितता से जारी रखते हैं और LAC पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए क्या व्यावहारिक कदम उठाते हैं।




