पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। ईरान और ओमान के बीच समुद्री यातायात को सामान्य करने को लेकर बातचीत चल रही थी, इसी दौरान ईरान के क़ेश्म द्वीप के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला होने की खबर सामने आई। घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इसी बीच ओमान में ईरान, इराक और खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों की प्रस्तावित बैठक भी स्थगित कर दी गई। इस बैठक का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर किसी साझा व्यवस्था पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना था।
रिपोर्टों के अनुसार, क़ेश्म द्वीप के नजदीक होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ईरानी कार्गो जहाज को प्रक्षेप्य से निशाना बनाया गया। हमले में एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी दी गई है। घटना की जिम्मेदारी और हमले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए ईरान और ओमान के बीच बातचीत का सिलसिला चल रहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी जहाज पर हमला या समुद्री यातायात में लंबे समय तक रुकावट पैदा होने की स्थिति का असर केवल क्षेत्रीय देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि हालिया घटना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
इसी बीच ओमान के सलालाह में होने वाली एक अहम क्षेत्रीय बैठक को स्थगित कर दिया गया। बैठक में ईरान के साथ इराक और खाड़ी क्षेत्र के देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना थी। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा करना और क्षेत्रीय स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश करना था। हालांकि, बैठक से पहले ही यह स्पष्ट हो गया कि प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सभी देशों के बीच पर्याप्त सहमति नहीं बन पाई है। ओमान की ओर से बैठक स्थगित किए जाने की पुष्टि की गई और संकेत दिया गया कि व्यापक क्षेत्रीय सहमति के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के कुछ हिस्सों को लेकर खाड़ी देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। खासकर समुद्री सुरक्षा और ईरान के साथ किसी नई व्यवस्था को लेकर कुछ देशों की चिंताएं बनी हुई हैं। क्षेत्र में हाल के सैन्य घटनाक्रम और ईरान से जुड़े समूहों की गतिविधियों ने भी इन चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में खाड़ी देशों के लिए ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचना आसान नहीं है। क्षेत्रीय देशों की प्राथमिकताओं में अंतर भी बैठक स्थगित होने की प्रमुख वजहों में शामिल माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत चल रही है। दोनों देश समुद्री यातायात के लिए सुरक्षित व्यवस्था और जहाजों के आवागमन से संबंधित प्रक्रियाओं पर चर्चा कर रहे हैं। प्रस्ताव का मकसद संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध कराना है। हालांकि, ईरान का रुख है कि होर्मुज की स्थिति को केवल समुद्री यातायात के तकनीकी मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता। तेहरान इसे क्षेत्र में चल रहे व्यापक राजनीतिक और सैन्य तनाव से जोड़कर देखता है।
ईरानी नेतृत्व की ओर से पहले भी संकेत दिया गया है कि होर्मुज में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए व्यापक क्षेत्रीय परिस्थितियों में सुधार जरूरी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तथा आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे समुद्री मार्ग से जुड़े विवाद को और जटिल बनाते हैं। दूसरी ओर, खाड़ी देश चाहते हैं कि उनके व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों को किसी भी सैन्य संघर्ष से सुरक्षित रखा जाए। यही अंतर वार्ता प्रक्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
हाल के घटनाक्रमों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों से जुड़े हमलों की खबरों के बीच देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार भी पश्चिम एशिया की घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है।
होर्मुज संकट का असर तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इस समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होने के कारण किसी भी लंबे व्यवधान से आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने की संभावना रहती है। तेल महंगा होने पर परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ कई देशों में महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह चिंता और महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल पर निर्भर करता है।
फिलहाल ईरान, ओमान और खाड़ी देशों के बीच बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। प्रस्तावित बैठक को रद्द करने के बजाय स्थगित किया गया है, इसलिए भविष्य में वार्ता फिर शुरू होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, अगली बातचीत तभी प्रभावी हो पाएगी जब क्षेत्रीय देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और ईरान के साथ प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर पर्याप्त सहमति बन सके। मौजूदा परिस्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती सैन्य तनाव को नियंत्रित करना और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक समुद्री व्यापार मार्ग का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम एशिया की सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार से सीधे जुड़ा विषय बन चुका है। एक तरफ ईरान और ओमान तनाव कम करने तथा समुद्री यातायात को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में जारी सैन्य घटनाएं इन प्रयासों को लगातार चुनौती दे रही हैं। आने वाले दिनों में इस बात पर नजर रहेगी कि क्षेत्रीय देश मतभेदों को दूर कर नई बैठक बुलाने और होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किसी साझा व्यवस्था पर पहुंच पाते हैं या नहीं।




