चौथा वर्ष: विकास की गति को प्रशासन की रीढ़ मिली

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प्रेम शंकर झा, आइआरएसएस

नरेंद्र मोदी के कार्यकारी जीवन के 25 वर्षों को पीछे मुड़कर देखने पर वर्ष 2004 एक ऐसे पड़ाव के रूप में सामने आता है, जब गुजरात में शासन की दिशा से अधिक महत्वपूर्ण उसके तौर तरीके होने लगे थे। मुख्यमंत्री के रूप में चौथे वर्ष तक पहुंचते पहुंचते राज्य में विकास और औद्योगिक विस्तार की जरूरतें स्पष्ट हो चुकी थीं। अब असली कसौटी यह थी कि प्रशासन इन प्राथमिकताओं को कितनी तेजी और कितनी व्यवस्थित तरीके से जमीन पर उतार सकता है। यही वह दौर था जब शासन को अधिक जवाबदेह, निगरानी को अधिक प्रत्यक्ष और सरकारी योजनाओं की पहुंच को अधिक व्यापक बनाने की कोशिशें तेज हुईं।

मई 2004 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार सत्ता में आई, जबकि गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने कामकाज में आगे बढ़ रही थी। केंद्र और राज्य के अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच गुजरात का प्रशासन अपने स्तर पर विकास की गति बनाए रखने की चुनौती से गुजर रहा था। ऐसे समय में राज्य के भीतर संस्थागत क्षमता को मजबूत करना और भी महत्वपूर्ण हो गया।

इस बदलाव की सबसे स्पष्ट तस्वीर प्रशासनिक निगरानी में दिखाई दी। अप्रैल 2003 में शुरू हुआ स्वागतम कार्यक्रम अब केवल एक प्रयोग नहीं रह गया था। इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्री और जिलों को जोड़कर उन शिकायतों की समीक्षा की जाती थी, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाया था। संबंधित अधिकारी को मामले की स्थिति और की गई कार्रवाई का जवाब देना होता था। इससे शिकायत निवारण व्यवस्था में जवाबदेही सीधे प्रशासनिक समीक्षा से जुड़ गई।

स्वागतम की अहमियत केवल इतनी नहीं थी कि इसमें नई तकनीक का इस्तेमाल हुआ। असली बदलाव यह था कि प्रशासन के सबसे निचले स्तर पर अटकी शिकायत को राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाने के लिए एक नियमित व्यवस्था बनाई गई। बाद में इसी पहल को ई गवर्नेंस के क्षेत्र में व्यापक पहचान मिली। उस समय के लिहाज से यह प्रशासन में सूचना के प्रवाह और निर्णय की गति, दोनों को बदलने वाला प्रयोग था।

गुजरात में विकास की दूसरी जरूरत ग्रामीण संपर्क की थी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को सड़कों से जोड़ने का काम चल रहा था और गुजरात में परियोजनाओं की निगरानी के लिए ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा था। सड़क किसी गांव तक पहुंचने वाली केवल एक निर्माण परियोजना नहीं होती। उसके साथ बाजार तक पहुंच, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार के अवसर भी जुड़ते हैं। इसलिए ग्रामीण सड़क नेटवर्क को विकास के व्यापक ढांचे का हिस्सा बनाना प्रशासनिक प्राथमिकता बन रहा था।

शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में भी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर था। मध्याह्न भोजन योजना का विस्तार विशेष रूप से उन इलाकों में महत्वपूर्ण था जहां आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां बच्चों की नियमित स्कूली उपस्थिति के सामने बाधा बनती थीं। आदिवासी क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाना इस बात का संकेत था कि विकास का प्रशासनिक अर्थ केवल बड़े शहरों और औद्योगिक केंद्रों तक सीमित नहीं रखा जा रहा था।

दूसरी ओर औद्योगिक विकास के लिए जमीन और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर काम जारी था। गुजरात औद्योगिक विकास निगम औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, भूमि उपलब्ध कराने और सड़क, पानी तथा बिजली जैसी सुविधाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। निवेश आकर्षित करने के बाद किसी राज्य के सामने सबसे कठिन काम उसे वास्तविक परियोजना में बदलने का होता है। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र, जमीन और बुनियादी सुविधाओं का तैयार होना जरूरी है। गुजरात में इस प्रशासनिक आधार को मजबूत किया जा रहा था।

2004-05 की तस्वीर को केवल बड़ी घोषणाओं से समझना मुश्किल है। इस वर्ष का महत्व उन व्यवस्थाओं में था जो रोजमर्रा के शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तैयार की जा रही थीं। मुख्यमंत्री कार्यालय से जिले तक निगरानी की नई पद्धति, गांवों तक बेहतर संपर्क, स्कूलों में बच्चों को बनाए रखने वाली योजनाएं और उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचा, ये सभी अलग अलग क्षेत्र थे, लेकिन इनके पीछे प्रशासन की क्षमता बढ़ाने की एक समान दिशा दिखाई देती थी।

25 वर्षों की इस कार्यकारी यात्रा में यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है कि यहां विकास और प्रशासन एक दूसरे से अलग विषय नहीं रह जाते। विकास के लिए संसाधन जुटाना जरूरी था, लेकिन उससे कम जरूरी नहीं था उन संसाधनों को समय पर जमीन तक पहुंचाना। चौथे वर्ष में गुजरात इसी दूसरे पक्ष को मजबूत करता दिखाई देता है। शासन की सफलता को घोषणाओं से निकालकर निगरानी, क्रियान्वयन और परिणाम से जोड़ने की प्रक्रिया इस दौर में अधिक स्पष्ट हुई।

यही 2004-05 की सबसे महत्वपूर्ण विरासत थी। विकास की दिशा पहले से मौजूद थी, लेकिन उसे लंबे समय तक चलाने के लिए जिस प्रशासनिक रीढ़ की जरूरत थी, वह मजबूत की जा रही थी। आगे की यात्रा में गुजरात जिस बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे, उद्योग और शासन सुधारों के प्रयोगों की ओर बढ़ा, उनके लिए यह प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण एक महत्वपूर्ण आधार बना।

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