पर्यावरण संरक्षण में भारत की नई पहल, पीएम मोदी ने दुनिया के सामने रखा देश का ग्रीन मॉडल

SHARE:

नई दिल्ली में आयोजित ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के भारत के प्रयासों को रेखांकित किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत समेत 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, पर्यावरण विशेषज्ञ, न्यायाधीश और विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर अनुभव साझा करना तथा पर्यावरणीय कानून और शासन व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करना है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण को केवल आधुनिक समय की आवश्यकता के तौर पर नहीं देखता, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन की भावना देश की परंपरा में लंबे समय से मौजूद रही है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी पारंपरिक सोच को आधुनिक तकनीक, नीतियों और नवाचार के साथ जोड़कर जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं देखता, बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी तय करते समय उनके विकास की आवश्यकताओं और ऐतिहासिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाए जाने वाले मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि देश अपनी क्षमता के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में हुई वृद्धि को भी प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2 गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। सरकार की ओर से घरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी पहल शुरू की गई है। इसके तहत बड़ी संख्या में घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा, जलविद्युत और अन्य गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की क्षमता बढ़ाने को भी भारत की ऊर्जा रणनीति का हिस्सा बताया।

पर्यावरण अनुकूल परिवहन के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन ट्रेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे स्वच्छ परिवहन और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। हाइड्रोजन आधारित ट्रेन में ईंधन सेल तकनीक के जरिए हाइड्रोजन से बिजली तैयार की जाती है, जिससे पारंपरिक डीजल आधारित ट्रेनों की तुलना में उत्सर्जन को कम करने की संभावना रहती है। भारत में हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को स्वच्छ और वैकल्पिक परिवहन तकनीक की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे के विद्युतीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर बताया। उनके अनुसार, रेलवे के व्यापक विद्युतीकरण से डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। इसी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और उससे जुड़े उत्सर्जन को कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने भारत की कई अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय पहलों का भी उल्लेख किया। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और मिशन LiFE जैसी पहल शामिल हैं। इन पहलों के जरिए भारत सौर ऊर्जा, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे, जैव ईंधन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने जलवायु संबंधी अपने निर्धारित लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में प्रगति की है। सरकार के अनुसार, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और उत्सर्जन की तीव्रता को कम करने पर भी काम किया है। जलवायु नीति के क्षेत्र में भारत की प्रगति को सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करती रही है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रेलवे विद्युतीकरण और आधुनिक तकनीक को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए भारत के विकास मॉडल की चर्चा की। सरकार का तर्क है कि स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों में निवेश से उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ नए उद्योग, रोजगार और तकनीकी अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय कानून और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर अपने अनुभव और पहलों को सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सौर ऊर्जा से लेकर हाइड्रोजन ट्रेन तक कई उदाहरणों का उल्लेख करते हुए भारत की पर्यावरणीय रणनीति को रेखांकित किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इस बात पर चर्चा का अवसर देती है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में पर्यावरण संरक्षण, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत विकास के बीच किस तरह बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

Leave a Comment