पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका तेहरान की रखी शर्तों को स्वीकार नहीं करता और अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करता, तब तक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और पुराने प्रारूप में बातचीत शुरू करने का सवाल नहीं उठता। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने 20 सितंबर को संसद में दिए बयान में कहा कि तेहरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक अपनी स्थिति और शर्तें स्पष्ट रूप से पहुंचा दी हैं।
गालिबाफ के मुताबिक, ईरान का रुख अब स्पष्ट और अपरिवर्तनीय है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरानी जनता के अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक न तो पुराने बातचीत तंत्र में वापसी होगी और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी नए समझौते में उसकी संप्रभुता और अधिकारों की मान्यता तथा अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के वास्तविक क्रियान्वयन को महत्व दिया जाना चाहिए।
इससे पहले ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए तेहरान की शर्तों की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, विदेशों में जमा ईरानी धन को जारी करना, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना, ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप रोकना और ईरानी क्षेत्र पर अमेरिकी हमले समाप्त करना शामिल हैं। रेजाई ने कहा कि ये शर्तें कतर के मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम है। इस रास्ते से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है। मौजूदा संघर्ष के दौरान यहां समुद्री यातायात में रुकावट और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ाई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी पहुंच चुकी हैं।
ईरान का कहना है कि होर्मुज को खोलने का फैसला उसकी शर्तों की पूर्ति से जुड़ा हुआ है। गालिबाफ ने कहा कि जब तक तेहरान की मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक जलडमरूमध्य को खोलने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल होर्मुज को अपने रणनीतिक दबाव के प्रमुख साधनों में से एक के रूप में देख रहा है। हालांकि, जलडमरूमध्य की वास्तविक स्थिति, समुद्री यातायात और सैन्य गतिविधियों में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए स्थिति को गतिशील माना जा रहा है।
तनाव के बीच ईरानी सैन्य कमान की ओर से भी अमेरिका को चेतावनी दी गई है। ईरान के खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने कहा है कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सैन्य पक्ष ने क्षेत्र के उन देशों को भी चेतावनी दी है जो किसी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भाग लेते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं।
दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से भी ईरान पर दबाव बनाए रखने के संकेत मिले हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान से जुड़े समुद्री यातायात पर अपनी कार्रवाई के तहत 109 वाणिज्यिक जहाजों के मार्ग बदलने की जानकारी दी है। यह घटनाक्रम होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों के आसपास समुद्री परिवहन पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
ईरान की नई शर्तों का एक हिस्सा जून में हुए समझौते से भी जुड़ा बताया जा रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, जून के समझौते में युद्ध रोकने, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने, नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने और ईरान के जमे हुए धन को जारी करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी बताए गए थे। हालांकि, बाद में यह समझौता समाप्त हो गया और दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर बढ़ गया।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि वह एक तरफ सैन्य दबाव का सामना करने के लिए तैयार है, जबकि दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा। रेजाई ने कहा कि तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं और अब अमेरिकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि ओमान की मध्यस्थता के जरिए होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर किसी व्यवस्था पर चर्चा हुई थी, हालांकि इसके अंतिम रूप लेने की पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी चेतावनी भी जारी की है। अमेरिकी विदेश विभाग की सलाह में क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा स्थिति को जटिल बताते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की बात कही गई है। क्षेत्र में चल रहे संघर्ष, समुद्री मार्गों पर तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बातचीत का कोई रास्ता निकलता है और क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर किसी समझौते पर सहमति बनती है। ईरान ने अपनी शर्तों को सार्वजनिक कर दिया है और गालिबाफ ने स्पष्ट कर दिया है कि इन शर्तों की पूर्ति के बिना होर्मुज खोलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से ईरान की इन सभी शर्तों को स्वीकार किए जाने की कोई घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव, समुद्री परिवहन और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके प्रभाव को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।




