दवाओं की ऑनलाइन और होम डिलीवरी पर नियामकीय नजर, DTAB फिर करेगा विचार

SHARE:

भारत में दवाओं की होम डिलीवरी को लेकर एक बार फिर नियामकीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई दवाओं की डोरस्टेप डिलीवरी व्यवस्था को लेकर ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने दोबारा समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। हालांकि, अभी देशभर में दवाओं की होम डिलीवरी बंद करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मौजूदा घटनाक्रम का संबंध उस विशेष व्यवस्था से है जिसे मार्च 2020 में महामारी के दौरान लागू किया गया था। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 26 मार्च 2020 की G.S.R. 220(E) अधिसूचना को दवाओं की रिटेल डोरस्टेप डिलीवरी से संबंधित नियम के रूप में दर्ज किया गया है।

दरअसल, कोविड-19 के दौरान देश में लॉकडाउन और आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण मरीजों के लिए मेडिकल स्टोर तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसी स्थिति में सरकार ने 26 मार्च 2020 को G.S.R. 220(E) के जरिए कुछ निर्धारित शर्तों के तहत लाइसेंस प्राप्त खुदरा दवा विक्रेताओं को मरीजों तक दवाएं पहुंचाने की अनुमति दी थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य महामारी के दौरान मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना था। बाद में जब कोविड से जुड़ी आपात परिस्थितियां कम हुईं, तब इस अस्थायी व्यवस्था को आगे जारी रखने या इसे वापस लेने का सवाल सामने आया।

दवाओं की होम डिलीवरी को लेकर दवा कारोबारियों के संगठनों की ओर से भी आपत्तियां सामने आई हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने सरकार से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की थी। संगठन की ओर से ऑनलाइन और डोरस्टेप बिक्री में प्रिस्क्रिप्शन के सत्यापन तथा दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों के पालन को लेकर चिंताएं उठाई गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में संसद में बताया था कि CDSCO को इस व्यवस्था के कारण अनधिकृत प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री में वृद्धि या दुरुपयोग से संबंधित कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। साथ ही सरकार ने यह भी पुष्टि की थी कि व्यवस्था वापस लेने की मांग प्राप्त हुई थी।

इस मामले पर DTAB पहले भी विचार कर चुका है। 24 अप्रैल 2025 को हुई DTAB की 92वीं बैठक में G.S.R. 220(E) को वापस लेने से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। इसके बाद इस मुद्दे की विस्तृत समीक्षा के लिए एक उपसमिति की प्रक्रिया आगे बढ़ी। संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, DTAB एक वैधानिक तकनीकी सलाहकारी निकाय है, जो Drugs and Cosmetics Act, 1940 और उससे जुड़े नियमों के प्रशासन से संबंधित तकनीकी मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देता है।

इसके बाद मामला 2026 में भी DTAB के सामने बना रहा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की वेबसाइट पर 27 अगस्त 2026 को हुई DTAB की 94वीं बैठक के दस्तावेज दर्ज हैं और बैठक की जानकारी 16 सितंबर 2026 को वेबसाइट पर सूचीबद्ध की गई। इससे स्पष्ट है कि होम डिलीवरी से संबंधित पुराने कोविडकालीन प्रावधान पर नियामकीय स्तर पर प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।

होम डिलीवरी की व्यवस्था को लेकर मुख्य बहस सुविधा और नियमन के बीच संतुलन की है। बुजुर्ग मरीजों, लंबे समय से इलाज करा रहे लोगों, चलने-फिरने में परेशानी वाले मरीजों और ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए घर तक दवा पहुंचना उपयोगी सुविधा हो सकती है। दूसरी ओर, दवाओं की बिक्री में प्रिस्क्रिप्शन की जांच, सही मरीज तक सही दवा पहुंचना, बिक्री का रिकॉर्ड रखना और दवाओं की उचित स्थिति में आपूर्ति जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। इसलिए नियामकीय समीक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुविधा उपलब्ध रहने की स्थिति में दवा बिक्री से जुड़े सुरक्षा नियमों का पालन भी प्रभावी ढंग से हो।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि दवाओं की होम डिलीवरी की अनुमति को बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री की सामान्य अनुमति नहीं माना जा सकता। प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं के लिए Drugs and Cosmetics Rules के तहत अलग-अलग श्रेणियों और निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है। इसलिए यदि डोरस्टेप डिलीवरी व्यवस्था जारी रहती है, तब भी संबंधित दवा विक्रेताओं को लागू दवा बिक्री नियमों और प्रिस्क्रिप्शन संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

ऑनलाइन दवा बिक्री और डोरस्टेप डिलीवरी का विस्तार होने के साथ नियामकों के सामने निगरानी से जुड़ी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑर्डर लेने, डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जांच करने, दवा की सही पहचान करने और डिलीवरी के दौरान उसकी गुणवत्ता बनाए रखने जैसे कई चरण इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यही वजह है कि केवल सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय उसके लिए स्पष्ट नियम और प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दवाओं की होम डिलीवरी पर देशव्यापी रोक का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। DTAB की समीक्षा प्रक्रिया चल रही है और आगे की कार्रवाई संबंधित सिफारिशों तथा सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी। CDSCO की आधिकारिक वेबसाइट पर DTAB की 94वीं बैठक सहित हाल की बैठकों के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि देशभर में दवाओं की घर तक डिलीवरी पूरी तरह बंद होने जा रही है।

आने वाले समय में इस मामले में दो संभावित पहलुओं पर विशेष ध्यान रहेगा—पहला, कोविड के दौरान शुरू की गई मौजूदा डोरस्टेप डिलीवरी व्यवस्था को उसी रूप में जारी रखा जाए या उसमें बदलाव किया जाए; और दूसरा, यदि इसे जारी रखा जाता है तो प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन, रिकॉर्ड-कीपिंग और दवा वितरण की निगरानी को किस तरह मजबूत किया जाए। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मरीजों और दवा विक्रेताओं के लिए मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।

Leave a Comment