मांझी ने उठाया SC-ST सांसदों के बोलने का मुद्दा, लोकसभा अध्यक्ष से मांगी उचित व्यवस्था

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केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों से आने वाले सांसदों को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों और चर्चाओं के दौरान अधिक समय देने की मांग की है। मांझी ने अपने पत्र में कहा है कि इन समुदायों से जुड़े सांसदों को अपने समाज से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को सदन में प्रभावी ढंग से रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने और संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश देने का अनुरोध किया है।

मांझी का यह पत्र 16 सितंबर 2026 का बताया जा रहा है। इससे पहले 5 अगस्त को दिल्ली में उनके आवास पर NDA सांसदों की एक बैठक हुई थी। इसी बैठक के दौरान मध्य प्रदेश के खरगोन से भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने SC और ST समुदायों से आने वाले सांसदों के लिए सदन में बोलने का पर्याप्त समय उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद मांझी ने इस सुझाव को लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचाने का फैसला किया। मांझी की ओर से लिखे गए पत्र में बैठक के दौरान उठाए गए इस विषय का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष से उचित कार्रवाई का आग्रह किया गया है।

गजेंद्र सिंह पटेल ने इस मुद्दे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि राजनीतिक दलों को संसद में बोलने के लिए निर्धारित समय मिलता है और फिर उस समय का बंटवारा संबंधित दल के सांसदों के बीच किया जाता है। ऐसे में SC और ST समुदायों से आने वाले सांसदों के पास अपने समुदायों से जुड़े विषयों को विस्तार से रखने के लिए समय सीमित हो सकता है। पटेल के मुताबिक उनकी मांग यह नहीं है कि SC/ST सांसदों को अभी सदन में बोलने का अवसर नहीं मिलता, बल्कि उनका कहना है कि इन सांसदों को कुछ अतिरिक्त समय मिलना चाहिए, ताकि वे अपने समुदायों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को ज्यादा विस्तार से संसद के सामने रख सकें।

मांझी ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि 5 अगस्त को उनके आवास पर हुई बैठक केवल SC/ST सांसदों के लिए आयोजित बैठक नहीं थी। इसमें NDA के सांसद शामिल हुए थे और इसी दौरान अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई। इसी चर्चा के बीच SC/ST सांसदों को सदन में बोलने के लिए अधिक समय दिए जाने का सुझाव सामने आया। बैठक में उठाए गए इस मुद्दे को मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचाया है, ताकि सदन की कार्यवाही में इस पर विचार किया जा सके।

लोकसभा में किसी सदस्य को बोलने का अवसर और चर्चा के दौरान उसके लिए निर्धारित समय सदन की कार्यवाही तथा अध्यक्ष की व्यवस्था के अनुसार तय होता है। किसी विधेयक या अन्य विषय पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों को बोलने के लिए समय दिया जाता है और अध्यक्ष सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित करने के लिए भाषणों की समय-सीमा भी निर्धारित कर सकते हैं। इसी व्यवस्था के संदर्भ में SC/ST सांसदों के लिए अतिरिक्त बोलने का समय देने की मांग सामने आई है।

इस मांग के पीछे मुख्य तर्क यह है कि संसद में SC और ST समुदायों से संबंधित विषयों को उन समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद अधिक प्रत्यक्ष रूप से सदन के सामने रख सकते हैं। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक कल्याण, आरक्षण, आदिवासी क्षेत्रों का विकास, सरकारी योजनाओं का लाभ और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे इन समुदायों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। मांझी और पटेल की ओर से उठाई गई मांग में इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे मुद्दों को संसद में पर्याप्त समय और स्थान मिलना चाहिए।

जीतन राम मांझी पहले भी SC और ST समुदायों से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर जैसे विषयों पर भी वह सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति रख चुके हैं। उनका तर्क रहा है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन वर्गों तक भी प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए जो सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक वंचित हैं। हालांकि इन विषयों पर राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच अलग-अलग विचार रहे हैं और इन्हें लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस भी होती रही है।

मांझी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र के बाद अब इस बात पर ध्यान है कि संसद की कार्यवाही में SC/ST सांसदों के लिए बोलने के समय को लेकर कोई अलग व्यवस्था की जाती है या नहीं। फिलहाल यह मांग लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी गई है और आगे की व्यवस्था सदन के नियमों तथा अध्यक्ष के निर्णय के अनुसार तय होगी। इस पहल ने संसद में सांसदों को मिलने वाले बोलने के समय और विभिन्न सामाजिक समुदायों से जुड़े मुद्दों को सदन में पर्याप्त अवसर मिलने की बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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