कैबिनेट ने ITMS को दी मंजूरी, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन एवं जाम से राहत की दिशा में बड़ा कदम

SHARE:

दिल्ली में तीन चरणों में लागू होगा Intelligent Traffic Management System, ₹1,790 करोड़ की लागत से होगा तैयार

Reported by: निखिल रस्तोगी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दिल्ली के लिए Intelligent Traffic Management System (ITMS) को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में इसकी जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट में आज तीन बड़े फैसले लिए गए, जिनमें ITMS भी शामिल है। दिल्ली जैसे मेगा सिटी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सिस्टम को लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, सुचारु यातायात संचालन और जाम की समस्या से राहत दिलाना है।

मौजूदा समय में दिल्ली के 1,529 ट्रैफिक सिग्नल फिक्स टाइमिंग पर संचालित होते हैं और ट्रैफिक बढ़ने की स्थिति में वे अपने आप टाइमिंग एडजस्ट नहीं कर पाते। वहीं रेड-लाइट और ओवर-स्पीड कैमरे पहले से इस्तेमाल में हैं, लेकिन ये अलग-अलग सिस्टम के रूप में काम करते हैं।

कैसे काम करेगा ITMS

इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि यह बढ़ते हुए ट्रैफिक और कम ट्रैफिक के हिसाब से सिग्नल को ऑपरेट करेगा, जिससे ट्रैफिक का दबाब ना हो, और लोगों को राहत मिलेगी ट्रैफिक जाम से,ITMS के तहत सिग्नल कंट्रोल, ट्रैफिक इंफोर्समेंट और लाइव ट्रैफिक इंफॉर्मेशन को एक ही टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।

ट्रैफिक रेगुलेशन के तहत एडेप्टिव सिग्नल पूरे कॉरिडोर में सिंक होंगे, जिससे जाम का जल्दी पता चलेगा और सिग्नल टाइमिंग ऑटोमैटिक एडजस्ट होगी।

AI की मदद से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का पता लगाया जाएगा और चोरी की तथा हॉट-लिस्टेड गाड़ियों को सिस्टम खुद फ्लैग करेगा।

लोगों को जाम, पार्किंग और डायवर्जन की रियल-टाइम जानकारी और अपडेट मिलेंगे।

पूरे सिस्टम की निगरानी के लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा, जो ओपन स्टैंडर्ड पर आधारित होगा ताकि भविष्य में अन्य सिस्टमों को भी जोड़ा जा सके।

साइबर सिक्योरिटी के तहत सुरक्षित डेटा सेंटर, एन्क्रिप्टेड नेटवर्क और CERT-In द्वारा अधिकृत ऑडिट की व्यवस्था होगी।

तीन चरणों में होगा लागू

ITMS को 24 महीनों में तीन चरणों में लागू किया जाएगा और इसके बाद पांच वर्षों तक इसका रखरखाव भी किया जाएगा।

पहला चरण — 12 महीने: 5 ट्रैफिक कॉरिडोर, 250 स्मार्ट सिग्नल और मुख्य कमांड सेंटर।

दूसरा चरण — 6 महीने: 7 ट्रैफिक कॉरिडोर, 222 स्मार्ट सिग्नल और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम।

तीसरा चरण — 6 महीने: 30 ट्रैफिक कॉरिडोर और 620 स्मार्ट सिग्नल।

परियोजना की कुल लागत ₹1,790 करोड़ होगी। C-DAC तकनीकी सलाहकार के रूप में काम करेगा। परियोजना को लागू करने के लिए प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से Master System Integrator का चयन किया जाएगा।

ITMS की निगरानी के लिए तीन समितियां गठित की जाएंगी। इनकी अगुवाई केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) करेंगे।

Leave a Comment