यूक्रेन युद्ध पर पुतिन ने पीएम मोदी की सराहना की, रूस पर हमले को लेकर नाटो को चेताया

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मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान और बातचीत की जरूरत पर लगातार जोर देते रहे हैं। पुतिन के मुताबिक, रूस और भारत के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है और जल्द से जल्द ऐसा समाधान खोजने की बात कही है जिसे संबंधित पक्ष स्वीकार कर सकें। पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।

रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं। भारत ने शुरुआत से ही संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। नई दिल्ली का कहना रहा है कि युद्ध के बजाय संवाद के जरिए विवादों का समाधान किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में पुतिन की ओर से मोदी की भूमिका की सराहना को भारत की कूटनीतिक स्थिति के प्रति रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी बीच पुतिन ने पश्चिमी देशों और नाटो को रूस के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 1 अक्टूबर 2026 को वाल्दाई डिस्कशन क्लब में बोलते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस यूरोपीय देशों पर हमला करने की कोई योजना नहीं बना रहा है। हालांकि उन्होंने साथ ही चेताया कि यदि रूस के किसी क्षेत्र पर सीधे तौर पर हमला किया जाता है तो मॉस्को अपनी सुरक्षा के लिए उपलब्ध सभी हथियारों के इस्तेमाल पर विचार करेगा। उनके इस बयान ने रूस और पश्चिम के बीच पहले से जारी सुरक्षा तनाव को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

पुतिन ने विशेष रूप से कालिनिनग्राद का उल्लेख किया, जो रूस का एक रणनीतिक क्षेत्र है और पोलैंड तथा लिथुआनिया के बीच स्थित होने के कारण नाटो देशों से घिरा हुआ है। रूस के लिए कालिनिनग्राद सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पुतिन के बयान में संकेत था कि यदि रूस के इस क्षेत्र या देश के किसी अन्य हिस्से पर सीधा हमला होता है तो रूस अपनी सैन्य क्षमताओं के इस्तेमाल का जवाबी विकल्प खुला रखेगा।

पुतिन के बयान में परमाणु हथियारों का संदर्भ भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, जब उन्होंने रूस के पास मौजूद सभी हथियारों के इस्तेमाल की बात कही तो इसमें परमाणु हथियारों की संभावना भी शामिल मानी गई। हालांकि पुतिन ने यह नहीं कहा कि किसी संभावित हमले की स्थिति में रूस निश्चित रूप से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा। उनका बयान मुख्य रूप से इस बात की चेतावनी के रूप में सामने आया कि रूस के खिलाफ सीधे सैन्य हमले की स्थिति में मॉस्को अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।

रूस और नाटो के बीच तनाव यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार बढ़ा है। मॉस्को लंबे समय से नाटो की सैन्य गतिविधियों और पूर्वी यूरोप में गठबंधन की मौजूदगी को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। रूस की ओर से पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को सैन्य, तकनीकी और खुफिया सहायता देने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। वहीं नाटो अपनी गतिविधियों को रक्षात्मक बताता है और रूस की ओर से दी जाने वाली परमाणु हथियारों से जुड़ी चेतावनियों पर चिंता व्यक्त करता रहा है।

पुतिन ने अपने बयान में एक तरफ पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया, लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों के खिलाफ युद्ध शुरू करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को संवेदनशील बताते हुए संकेत दिया कि सैन्य तनाव को उस स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए जहां घटनाओं पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाए। इस बयान को रूस की ओर से एक साथ दो संदेशों के रूप में देखा जा रहा है—पहला, मॉस्को प्रत्यक्ष सैन्य हमले को गंभीरता से लेगा और दूसरा, रूस यूरोप के साथ सीधे युद्ध की शुरुआत का दावा नहीं कर रहा है।

भारत और रूस के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग, व्यापार और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं, जबकि पश्चिमी देशों के साथ भी भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार बढ़े हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बातचीत और कूटनीति पर जोर दिए जाने की पुतिन द्वारा सार्वजनिक रूप से सराहना भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुतिन के ताजा बयान में रूस-भारत संबंध और रूस-पश्चिम तनाव दोनों पहलू एक साथ सामने आए हैं। एक ओर रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों की प्रशंसा की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने रूस की क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी सीधे सैन्य हमले के खिलाफ पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया। कालिनिनग्राद का उल्लेख और सभी उपलब्ध हथियारों के इस्तेमाल की चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और नाटो के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक तनाव पहले से ही गंभीर बना हुआ है।

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