प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वह अब तक 17 अलग-अलग देशों की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह न केवल भारतीय कूटनीति की सफलता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का भी प्रमाण है।
विश्वभर में गूंजी भारत की आवाज
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इज़राइल, सिंगापुर जैसे प्रमुख देशों की संसद में भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा है। हर भाषण में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता दी।
अमेरिका से इज़राइल तक – एक वैश्विक यात्रा
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अमेरिका (2023): कैपिटल हिल में मोदी के भाषण को कांग्रेस सदस्यों ने स्टैंडिंग ओवेशन के साथ सराहा।
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ब्रिटेन (2015): ब्रिटिश संसद में दिए गए भाषण में उन्होंने दोनों देशों की साझा विरासत की बात की।
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इज़राइल (2017): किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इज़राइल यात्रा और संसद में ऐतिहासिक संबोधन।
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ऑस्ट्रेलिया (2014 और 2023): दोस्ती, खेल और संस्कृति पर आधारित एक मजबूत संबंध की नींव रखी।
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अमेरिका से इज़राइल तक – एक वैश्विक यात्रा
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अमेरिका (2023): कैपिटल हिल में मोदी के भाषण को कांग्रेस सदस्यों ने स्टैंडिंग ओवेशन के साथ सराहा।
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ब्रिटेन (2015): ब्रिटिश संसद में दिए गए भाषण में उन्होंने दोनों देशों की साझा विरासत की बात की।
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इज़राइल (2017): किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इज़राइल यात्रा और संसद में ऐतिहासिक संबोधन।
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ऑस्ट्रेलिया (2014 और 2023): दोस्ती, खेल और संस्कृति पर आधारित एक मजबूत संबंध की नींव रखी।
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राजनयिक रणनीति का हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक रणनीति भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की सोच को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक प्रभावशाली माध्यम रही है। इससे भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को भी नई गति मिली है।
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