पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘जीरो टैरिफ डील’ का सच अब सामने आ रहा है। इंडोनेशिया के साथ की गई ऐसी एक डील में दावा तो ‘शून्य शुल्क’ का था, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशियाई उत्पादों पर अब भी अमेरिका में 19% तक का आयात कर लगाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह “जीरो टैरिफ” शब्द महज़ एक राजनीतिक बयानबाज़ी हो सकती है, जबकि ज़मीनी हकीकत अलग है। इसी तरह के संकेत अब भारत को लेकर भी मिल रहे हैं। ट्रंप अगर 2024 में फिर राष्ट्रपति बनते हैं, तो भारत के साथ व्यापार समझौते में भी इसी तरह की शर्तें शामिल हो सकती हैं – नाम ‘जीरो टैरिफ’, लेकिन असल में शुल्क बरकरार।
ट्रंप प्रशासन के दौरान पहले भी भारत के साथ जीएसपी (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज़) समाप्त किया गया था, जिससे कई भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाज़ार में मिलने वाली छूट खत्म हो गई थी।
वाणिज्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को ट्रंप की संभावित ‘जीरो टैरिफ डील’ में शामिल किया गया, तो भारत को भी सतर्क रहना होगा, क्योंकि छूट के नाम पर कहीं नया शुल्क न थोप दिया जाए।
क्या ‘जीरो टैरिफ डील’ वास्तव में शुल्क-मुक्त व्यापार का रास्ता है या सिर्फ एक चुनावी जुमला? भारत के लिए यह सवाल अब और ज़रूरी हो गया है।




