उत्तर प्रदेश के कैराना से समाजवादी पार्टी की महिला सांसद इकरा चौधरी के साथ एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें “Get Out” कहकर अपने दफ्तर से बाहर निकाल दिया।
ये केवल एक महिला सांसद का नहीं, बल्कि लोकतंत्र का, जनप्रतिनिधित्व का और अंततः कैराना की जनता का अपमान है।
लेकिन हैरानी की बात ये रही कि सांसद इकरा चौधरी ने उस ‘बददिमाग़ बड़े बाबू’ को थप्पड़ तक नहीं मारा।
क्या ये चुप्पी शिष्टाचार थी या जनता की भावनाओं से किया गया समझौता?
सवाल बड़ा है:
जब एक सांसद को इस तरह दुत्कारा जा सकता है, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होता होगा?
पक्ष हो या विपक्ष — हर तरफ सन्नाटा पसरा है।
जो नेता हर रोज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, सोशल मीडिया पर मुद्दों को हवा देते हैं — वो इस अपमानजनक व्यवहार पर मौन क्यों हैं?
क्या महिला सांसद के आत्मसम्मान की कोई कीमत नहीं?
अब यह केवल इकरा चौधरी का मामला नहीं रहा,
यह सवाल है – क्या एक जनप्रतिनिधि की गरिमा इस देश में सुरक्षित है?
सरकार को चाहिए कि इस अफसर पर तत्काल और सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी बाबू लोकतंत्र की मर्यादा लांघने की हिम्मत न कर सके।




