दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग यानी डाइट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां की एक छात्रा जब अपनी समस्या लेकर प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. बी.के. पाल के पास पहुंची, तो उन्होंने कथित तौर पर बेहद अभद्र टिप्पणी कर दी। उन्होंने छात्रा से कहा—“लड़की हो तो क्या मेरे कान में सूसू करोगी?”
यह घटना न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि दिल्ली सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
कभी आदर्श था यह संस्थान
डाइट कड़कड़डूमा, जो कभी राजधानी में शिक्षक प्रशिक्षण का एक उत्कृष्ट केंद्र माना जाता था, अब विवादों और राजनीति का अड्डा बन चुका है। पहले यहां के प्रिंसिपल रहे डॉ. जमीर के कार्यकाल में संस्थान की छवि अनुशासन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती थी। लेकिन जब से डॉ. बी.के. पाल ने दो साल पहले दरियागंज से आकर यहां का चार्ज संभाला, तब से माहौल बिगड़ने लगा है।
लगातार विवादों में प्रिंसिपल
प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. पाल पर पहले भी अपने सहकर्मियों से झगड़े, महिला स्टाफ को मानसिक प्रताड़ना और स्टूडेंट्स के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं। छात्राओं ने उनके सामने जाने तक से कतराना शुरू कर दिया है।
शिकायतें दर्ज, पर कार्रवाई नहीं
सूत्रों की मानें तो छात्रा और महिला स्टाफ की कई शिकायतें SCERT तक पहुंची हैं। लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि मेल और लिखित शिकायतें भी की गईं, मगर संस्थान चुप्पी साधे हुए है।
पसंदीदा कर्मचारियों को संरक्षण
डॉ. पाल पर यह भी आरोप है कि वे अपने करीबी माने जाने वाले दो ब्लॉक रिसोर्स पर्सन—कुलदीप कुमार और रेखा सिंघला—को नियमों के बावजूद संरक्षण दे रहे हैं। इन दोनों का तबादला डिफेंस कॉलोनी स्थित मुख्यालय में कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने आज तक रिपोर्ट नहीं किया। उल्टा, किसी और को हटवाकर ‘बलि का बकरा’ बनाने की कोशिश की जा रही है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से भी विवाद
डॉ. पाल का विवाद चपरासी तक से रहा है। कई बार मामला थाने तक गया, और आखिरकार उस कर्मचारी का तबादला करवा दिया गया।
शिक्षा मंत्री ने दिया बयान
जब इस पूरे मामले पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा—
“हम जल्द ही इस पूरे मामले की जांच कराएंगे। छात्राओं और महिला स्टाफ की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी।”
निष्कर्ष:
डाइट जैसे शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की घटनाएं न केवल छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए खतरा हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़ा करती हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षा विभाग और SCERT इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।




