लोकसभा में अगले सप्ताह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यह वही सैन्य अभियान है, जिसमें भारतीय सेना ने मणिपुर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में उग्रवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी और इसे एक “सफल ऑपरेशन” बताया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सदन में बयान देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से इस पर जोरदार दबाव डाला जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संसद में मौजूद रहें और जवाब दें। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।
कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री खुद स्थिति स्पष्ट करें, ताकि देश को पता चले कि ऑपरेशन की पृष्ठभूमि क्या थी, उसके क्या नतीजे रहे और भविष्य की रणनीति क्या है।
सरकार की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि चर्चा किस दिन कराई जाएगी और कौन जवाब देगा। हालांकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह या गृह मंत्री अमित शाह के जवाब देने की संभावना जताई जा रही है।
संसद के मानसून सत्र का यह मुद्दा अब और गरमाने की संभावना है, खासकर तब जब कई विपक्षी सांसदों ने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं रहे, तो वे चर्चा का बहिष्कार कर सकते हैं।




