दिनांक: 23 जुलाई 2025
स्कूल वाहनों के संचालन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं: परिवहन आयुक्त ने सभी जिलों और स्कूल प्रबंधन को दिए सख्त निर्देश
स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षित यात्रा उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी प्रतिबद्धता के तहत, परिवहन विभाग द्वारा 1 जुलाई से 15 जुलाई 2025 तक पूरे प्रदेश में सभी स्कूल वाहनों (बस, वैन, टैक्सी आदि) का व्यापक निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान चलाया गया। राज्य में कुल 67,613 पंजीकृत स्कूल वाहनों में से 46,748 वाहनों (लगभग 69%) की सघन जांच की गई।
इस विशेष अभियान के दौरान 4,089 वाहन (8.75%) मानक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। 1,768 वाहन बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के चल रहे थे, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा हैं। परिणामस्वरूप, 4,438 वाहनों का चालान किया गया, 913 वाहनों को जब्त किया गया और राज्यभर में ₹88.52 लाख का जुर्माना वसूला गया।
जिला-स्तर पर अभियान की समीक्षा में कुछ जिलों का प्रदर्शन प्रभावी रहा, जिनमें प्रमुख रूप से प्रयागराज, फर्रुखाबाद, लखनऊ और कानपुर नगर शामिल हैं। जबकि, मऊ, महाराजगंज, देवरिया, हापुड़ और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में निरीक्षण और प्रवर्तन कार्य अत्यंत कमजोर पाए गए, जो बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय है।
अभियान के दौरान प्रदेशव्यापी रूप से निम्नलिखित गंभीर उल्लंघन सामने आए:
(क) बड़ी संख्या में वाहनों का बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के संचालन।
(ख) निजी पंजीकृत वाहनों (मारुति ईको वैन, टैक्सी, ऑटो आदि) द्वारा अवैध रूप से स्कूली बच्चों का परिवहन।
(ग) अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों (GPS, CCTV, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार बॉक्स) की भारी कमी।
(घ) ड्राइवरों एवं परिचारकों का पुलिस सत्यापन, प्रशिक्षण और चिकित्सीय जांच न होना।
(ङ) कई निजी स्कूलों द्वारा अपने परिसर से नियमित संचालन के बावजूद निजी वाहनों से कोई औपचारिक संबंध न होना।
राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) सचिव एवं परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्कूल वाहनों का संचालन मोटर यान अधिनियम 1988, CMVR 1989, AIS-063, AIS-125 और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश मोटर यान (26वां संशोधन) नियम, 2019 के तहत सख्त प्रावधानों द्वारा नियंत्रित है, जिनमें शामिल हैं:
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स्कूल-स्वामित्व वाली बसों को धारा 76 के तहत SR-23K फॉर्म के माध्यम से निजी सेवा वाहन परमिट प्राप्त करना अनिवार्य है।
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निजी बसें (कॉन्ट्रैक्ट कैरिज) को स्कूल प्रबंधन से लिखित अनुबंध और SR-21K फॉर्म के अंतर्गत परमिट आवश्यक है।
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स्कूल वैन (13 सीट तक) के लिए वाहन स्वामी और अभिभावकों के बीच लिखित अनुबंध और SR-21B फॉर्म के माध्यम से स्कूल के जरिए अनुमोदन जरूरी है।
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वाहनों की आयु सीमा – स्कूल बस, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस व स्कूल वैन: अधिकतम 15 वर्ष।
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जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (जिलाधिकारी की अध्यक्षता में) एवं स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति (स्कूल प्रबंधन की अध्यक्षता में) का गठन अनिवार्य।
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ड्राइवर और परिचारकों का पुलिस सत्यापन, नियमित प्रशिक्षण एवं चिकित्सीय जांच अनिवार्य।
इन नियमों का उल्लंघन गंभीर कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन आयुक्त ने सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) अध्यक्षों, जिलाधिकारियों, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTO/ARTO) एवं स्कूल प्रबंधन/प्रधानाचार्यों को उनकी प्रशासनिक व कानूनी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्देशित की हैं।
परिवहन आयुक्त एवं राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री बृजेश नारायण सिंह ने मोटर यान अधिनियम की धारा 68(4) के अंतर्गत सभी RTAs को निर्देशित किया है:
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बिना परमिट के चल रहे निजी पंजीकृत वाहनों को तत्काल जब्त करें एवं सख्त कार्रवाई प्रारंभ करें।
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फिटनेस समाप्त वाहनों का संचालन तुरंत बंद करवाएं।
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जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के साथ समन्वय कर बार-बार नियम तोड़ने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करें।
जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें संचालित करें, अनुपालन की सख्त निगरानी करें और निजी वाहनों की मान्यता प्रक्रिया शीघ्र सुनिश्चित करें।
RTO/ARTO अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से स्कूलों से संबद्ध वाहनों की जांच करें, दस्तावेज, सुरक्षा उपकरण एवं ड्राइवरों का सत्यापन सुनिश्चित करें।
सभी स्कूल प्रबंधन/प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश है कि वे अपने स्कूल परिसर से संचालित प्रत्येक वाहन की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करें।
हर स्कूल को तत्काल स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति का गठन करना होगा, ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन, मेडिकल जांच एवं वाहनों की नियमित जांच सुनिश्चित करनी होगी। बिना मान्यता व परमिट के कोई भी निजी वाहन स्कूल से संचालित नहीं हो सकेगा। किसी भी लापरवाही की स्थिति में दुर्घटना या अपराध होने पर प्रबंधन और प्रधानाचार्य के विरुद्ध सख्त कानूनी, आपराधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है।
परिवहन आयुक्त श्री बृजेश नारायण सिंह ने एक कड़ा सार्वजनिक बयान जारी किया:
“स्कूल वाहनों के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारी, स्कूल प्रबंधक और वाहन संचालक अनिवार्य रूप से निर्धारित सुरक्षा मानकों का तत्काल पालन सुनिश्चित करें। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रदेश में स्कूली परिवहन प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और सख्त प्रवर्तन आधारित बनाना अत्यावश्यक है, जिससे लाखों बच्चों की यात्रा सुरक्षित और विश्वसनीय हो सके।
परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।




